कार्यालय के बाहर मार्किंग व्यवस्था खत्म होने के बाद अब प्रक्रिया कार्यालय के भीतर….
RTO वाहन मे निजी व्यक्तियों के घूमने की भूमिका और पारदर्शिता पर उठे सवाल…..
सतना। सतना क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। विभागीय सूत्रों, कुछ एजेंटों और आवेदकों का दावा है कि पहले चर्चित रहा कथित मार्किंग सिस्टम भले ही बदल गया हो, लेकिन शिकायतों का सिलसिला अब भी थमा नहीं है।
पहले कुछ फाइलों की कथित प्रारंभिक प्रक्रिया कार्यालय के बाहर संचालित होने की चर्चा थी, जबकि अब वही प्रक्रिया कार्यालय के भीतर कर्मचारियों के माध्यम से किए जाने का दावा किया जा रहा है। कुछ लोगों का यह भी आरोप है कि लाइसेंस संबंधी कार्यों में एक निजी व्यक्ति की भूमिका बनी हुई है। यदि ऐसा है, तो उसकी नियुक्ति, अधिकार और जिम्मेदारियों को लेकर विभाग को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, कार्यालय में निजी व्यक्तियों की मौजूदगी, सरकारी कार्यों में उनकी कथित भागीदारी तथा RTO कार्यालय के वाहन में उनके साथ देखे जाने जैसी शिकायतें भी समय-समय पर सामने आती रही हैं। वही ऑफिस सूत्रों की माने तो कार्यालय में लगभग 8 अन्य बाहरी/प्राइवेट कर्मचारियों को रखा गया है जो बाबू स्तर के काम करते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कोई निजी व्यक्ति सरकारी कार्यों में शामिल है, सरकारी गाड़ियों मे बैठते है, तो उसकी भूमिका सार्वजनिक की जानी चाहिए।
आवेदकों का कहना है कि लाइसेंस, वाहन ट्रांसफर और अन्य सेवाओं के लिए पारदर्शी, समयबद्ध और नियमसम्मत व्यवस्था होना आवश्यक है। उनका मानना है कि यदि शिकायतें निराधार हैं तो विभाग को तथ्यों के साथ उनका खंडन करना चाहिए, और यदि उनमें सच्चाई है तो निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
अब निगाहें परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और जिला प्रशासन पर हैं। लोगों की मांग है कि कार्यालय की कार्यप्रणाली, फाइलों के निस्तारण, निजी व्यक्तियों की भूमिका और पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाए, ताकि सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता बढ़े और आम नागरिकों का विश्वास मजबूत हो…..









