Edition

डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड में JAH की बड़ी उपलब्धि, OPD में मरीजों की परेशानी बरकरार

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

ग्वालियर
 मरीजों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड को डिजिटल प्लेटफार्म पर दर्ज करने के मामले में गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध जयारोग्य अस्पताल (जेएएच) मध्य प्रदेश में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। अस्पताल में अब तक 8 लाख 87 हजार 139 मरीजों का स्वास्थ्य रिकॉर्ड ऑनलाइन दर्ज किया जा चुका है।

स्थानीय व्यवस्थाओं में सुधार की जरूरत
इसके बावजूद ओपीडी में मरीजों को लंबी कतारों से राहत नहीं मिल रही है। डिजिटल रिकॉर्ड बनाने में तेजी के बीच मरीजों को पर्चा बनवाने और उपचार के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। इससे स्पष्ट है कि डिजिटल व्यवस्था के साथ ओपीडी की स्थानीय व्यवस्थाओं में सुधार की भी जरूरत है।

प्रतिदिन 2 से 3 हजार मरीजों का आभा पंजीयन
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के तहत जेएएच में आने वाले मरीजों को स्कैन-एंड-शेयर प्रक्रिया से जोड़कर आभा आईडी के माध्यम से उनका डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। अस्पताल में प्रतिदिन दो से तीन हजार मरीजों का आभा पंजीयन हो रहा है। इस मामले में जेएएच से आगे केवल एम्स भोपाल है। वहीं जबलपुर, रीवा, रतलाम और भोपाल के चिकित्सा संस्थान इससे पीछे हैं।

डिजिटल रिकॉर्ड में जेएएच प्रदेश में दूसरे स्थान पर
    पहला स्थान: एम्स भोपाल — 31,97,066
    दूसरा स्थान: जेएएच, ग्वालियर — 8,87,139
    तीसरा स्थान: नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज, जबलपुर — 8,40,607
    चौथा स्थान: श्याम शाह मेडिकल कॉलेज, रीवा — 7,70,727
    पांचवां स्थान: शासकीय मेडिकल कॉलेज, रतलाम — 6,78,598
    छठवां स्थान: गांधी मेडिकल कॉलेज, भोपाल — 6,07,230

मिशन का उद्देश्य
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत नागरिकों का डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड तैयार करने की दिशा में काम किया जा रहा है। आभा आईडी के जरिए मरीजों की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी डिजिटल रूप में उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित की जा रही है। इससे एबीडीएम से जुड़े अस्पतालों में उपचार के दौरान पुरानी जांच रिपोर्ट और चिकित्सा संबंधी जानकारी प्राप्त करना आसान हो सकता है। हालांकि, रिकॉर्ड का उपयोग मरीज की सहमति और लागू डेटा सुरक्षा नियमों के अनुसार ही किया जाना चाहिए।

    “मिशन के अंतर्गत जेएएच में निरंतर बेहतर कार्य किया जा रहा है। हम रोजाना ओपीडी में आने वाले हर मरीज को डिजिटल प्लेटफार्म से जोड़ रहे हैं, ताकि भविष्य में उनका इलाज और भी सुगम हो सके।” – डॉक्टर गजेंद्र पाल सिंह, नोडल अधिकारी, जेएएच

 

Aditya
Author: Aditya

Share करें

✓ Link copy हो गया!

Leave a Comment

और पढ़ें

error: Content is protected !!