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Iran Explosion: बंदर अब्बास और केश्म में धमाकों से मचा हड़कंप, तेल-गैस के दाम चढ़े, बाजार पर असर

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तेहरान 
अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर बड़े पैमाने पर युद्ध का खतरा मंडरा रहा है. होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़े तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान पर लगातार दूसरे दिन हमला किया. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर रविवार शाम से हमले शुरू किए गए. अमेरिका का कहना है कि इन हमलों का मकसद ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है, जिनका इस्तेमाल होर्मुज से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों और नागरिक नाविकों को निशाना बनाने में किया जा रहा है. ये हमले तीन घंटे से ज्यादा समय तक चलता रहा. इस बीच ईरानी मीडिया ने दावा किया है कि दक्षिणी ईरान के फारुर द्वीप पर हुए एक हमले में कम्युनिकेशन डिपार्टमेंट से जुड़े एक अधिकारी की मौत हो गई, जबकि दो अन्य घायल हुए हैं। 

तेल के सबसे अहम इलाके पर भी हमला
ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी ने बताया कि अमेरिकी हमले दक्षिण-पश्चिमी खुजेस्तान प्रांत तक हो रहे हैं. यहां पेट्रोलियम उद्योग के लिए मशहूर अहवाज शहर के आसपास दो जगहों को निशाना बनाया गया. बाद में अहवाज के उत्तर में स्थित अंदीमेश्क इलाके में भी एक और हमले की सूचना मिली. स्थानीय प्रशासन के मुताबिक नुकसान का आकलन किया जा रहा है। 

रिपोर्ट में कहा गया है, "पिछले कुछ रातों में अमेरिकी आतंकवादी ताकतों ने देश के दक्षिणी तट पर हमले किए हैं, जिसके परिणामस्वरूप कई मछुआरों और देश की रक्षा करने वालों की शहादत हुई है। 

इस हमले के जवाब में ईरान ने जॉर्डन, ओमान, बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला किया. इस हमले में फ्यूल डिपो, गोला-बारूद के बंकर, पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम और ड्रोन कमांड सेंटर नष्ट कर दिए गए। 

IRGC ने इन हमलों के बारे में तीन अलग-अलग बयान जारी किए. उन्होंने कहा कि ये हमले होर्मुज स्ट्रेट में नौसैनिक टकराव के बाद ईरानी तटीय ठिकानों पर अमेरिकी हमलों का जवाब थे। 

पहले चरण में IRGC ने कहा कि उन्होंने मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल करके जॉर्डन के प्रिंस हसन एयरबेस पर कई बड़े मिसाइल डिपो और फ्यूल स्टोरेज टैंकों में आग लगा दी. दूसरे चरण में IRGC एयरोस्पेस फोर्सेज ने बहरीन के शेख ईसा स्थित अमेरिकी बेस पर हेलीकॉप्टर रखरखाव और मरम्मत केंद्रों, P-8 इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर एयरक्राफ्ट हैंगर और ड्रोन कमांड एंड कंट्रोल सेंटर पर हमला किया। 

अमेरिका और ईरान के बीच की ये ताजा लड़ाई स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर कब्जे को लेकर है. सोमवार को अमेरिका और ईरान दोनों ने दावा किया कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर उनका नियंत्रण है. यह दावा पूरे मध्य पूर्व में सप्ताहांत में हुए हमलों के बाद किया गया, जिससे युद्ध खत्म करने की कूटनीतिक कोशिशों पर और खतरा मंडराने लगा है। 

ये हमले तब शुरू हुए जब ईरान ने रविवार को ओमान के तट के पास इस स्ट्रेट में एक कंटेनर जहाज पर हमला किया. इन हमलों ने एक बार फिर यह बात साफ कर दी कि यह जलमार्ग बातचीत में एक अहम मुद्दा बना हुआ है। 

युद्ध शुरू होने के बाद से ही फारस की खाड़ी के इस संकरे मुहाने पर जहाजों की आवाजाही में रुकावट आ रही है, क्योंकि ईरान ने इसके आसपास कमर्शियल जहाजों पर हमले करके और शिपिंग कंपनियों को डरा-धमकाकर इस पर अपनी पकड़ बनाए रखी है।  

ईरान और अमेरिका उस 60-दिन के अंतरिम समझौते की लगभग आधी अवधि पूरी कर चुके हैं, जिसका मकसद युद्ध को स्थायी रूप से खत्म करने के लिए बातचीत शुरू करना था. इसके बजाय स्थिति ऐसी हो गई है कि इस जलडमरूमध्य और इसके भविष्य को लेकर लगातार हमले हो रहे हैं, जिससे दुनिया के नेताओं को चिंता सता रही है कि ईरान के साथ युद्ध फिर से पूरी तरह शुरू हो सकती है। 

होर्मुज के पास फारुर द्वीप क्यों अहम है?
हमलों में जिस फारुर द्वीप का नाम सामने आया है, वह ईरान के होर्मोजगान प्रांत में बंदर लेंगेह के पास स्थित है. यह द्वीप दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य के बेहद करीब है. दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल का समुद्री निर्यात होर्मुज के रास्ते से गुजरता है. यही वजह है कि फारुर पर ईरान के सर्विलांस सिस्टम, सैन्य ठिकाने और समुद्री सुरक्षा नेटवर्क मौजूद हैं. मेहर न्यूज एजेंसी के मुताबिक रविवार शाम हुए हमले में कम्युनिकेशन से जुड़े एक अधिकारी की मौत हो गई और दो अन्य लोग घायल हुए. हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने इन दावों की पुष्टि नहीं की है। 

ईरान का खाड़ी देशों को चेतावनी
ईरान ने खाड़ी के कुछ देशों पर आरोप लगाया कि उनकी जमीन और सैन्य बेस का इस्तेमाल ईरान पर हमलों में किया गया. ईरान ने चेतावनी दी कि अगर किसी देश की जमीन से हमला किया गया तो उसे भी जवाबी कार्रवाई के लिए वैध लक्ष्य माना जाएगा। 

Aditya
Author: Aditya

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