Edition

बिहार में जाली करेंसी का अंतरराज्यीय नेटवर्क उजागर, सिलीगुड़ी से जुड़ा कनेक्शन; दो आरोपी फरार

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

 जोकीहाट (अररिया)
 सीमांचल के अररिया जिले में जाली नोटों (एफआईसीएन) के अवैध कारोबार की जड़ें पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी से लेकर अंतरराष्ट्रीय सीमाओं तक फैली नजर आ रही हैं।

महलगांव थाना क्षेत्र में बीते पांच अक्टूबर को 500 रुपये के 434 जाली नोटों (कुल दो लाख 17 हजार रुपये) के साथ पकड़े गए वार्ड सदस्य मो. पनाउल्लाह उर्फ पनबुल से पुलिस रिमांड और सघन पूछताछ में एक बड़े अंतरराज्यीय जाली करेंसी सिंडिकेट का पर्दाफाश हुआ है।

तफ्तीश में यह सनसनीखेज सच सामने आया है कि जाली नोटों की खेप किसी स्थानीय प्रिंटर से नहीं निकली थी, बल्कि इसे पश्चिम बंगाल के रणनीतिक शहर सिलीगुड़ी से विशेष सौदे के तहत खरीदा गया था।

1 लाख असली दो, 3 लाख जाली लो
पुलिस पूछताछ में वार्ड सदस्य पनाउल्लाह ने कबूल किया है कि इस पूरे सौदे की मुख्य कड़ी उसका करीबी साथी मो. आफताब था, जो फिलहाल फरार चल रहा है। आफताब ही पनाउल्लाह को सिलीगुड़ी लेकर गया था। वहां सिलीगुड़ी के एक शातिर जाली नोट तस्कर आलम से उसकी गोपनीय मुलाकात कराई गई।

आफताब ने कराई थी आलम से डील
सिलीगुड़ी में एक लाख रुपये की असली भारतीय करेंसी देकर तीन लाख रुपये के उच्च गुणवत्ता वाले 500-500 के जाली नोट हासिल किए गए थे। बरामद खेप में से ₹83,000 की राशि या तो आफताब के पास थी या उसे पहले ही कहीं ट्रायल के रूप में खपाया जा चुका था, जिसकी गहनता से छानबीन की जा रही है।

ग्रामीण हाट-बाजारों और खुदरा दुकानों में खपाने की थी साजिश
पनाउल्लाह ने स्वीकार किया कि इस नकली करेंसी को अररिया, जोकीहाट और आसपास के ग्रामीण हाट-बाजारों, पशु मेलों, गल्ला मंडियों और छोटी खुदरा दुकानों में खपाने की पूरी तैयारी कर ली गई थी। ग्रामीण इलाकों में 500 रुपये के नोटों की सूक्ष्म सुरक्षा विशेषताओं (Security Features) की जांच के लिए मशीनें नहीं होती हैं, जिसका फायदा उठाकर यह गिरोह आसानी से जाली नोटों को बाजार में उतार देता था।

पुलिस अब इस बात का पता लगा रही है कि क्या पनाउल्लाह और आफताब इससे पहले भी ऐसी कोई खेप सिलीगुड़ी से लाकर सीमांचल के बाजारों में खपा चुके हैं। इसके लिए पनाउल्लाह के सभी सक्रिय बैंक खातों के लेन-देन, यूपीआई विवरण और मोबाइल फोन की कॉल डिटेल रिपोर्ट (सीडीआर) का फॉरेंसिक विश्लेषण किया जा रहा है।

रातों-रात अमीर बनने की हवस
पुलिस जांच में सामने आया है कि पनाउल्लाह कम समय में अकूत संपत्ति बनाने के फेर में जाली नोटों के इस काले साम्राज्य में उतरा था। हाल के दिनों में उसकी माली हालत में तेजी से बदलाव आया था। उसने जोकीहाट के बरडेंगा में जमीन खरीदकर एक पक्का मकान खड़ा कर लिया था, जिसे वह ग्रामीणों के सामने अपनी ‘कामत’ (कृषि फार्म हाउस) बताता था।

बरडेंगा में बना लिया पक्का मकान
पनाउल्लाह का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड भी खंगाला गया है। वर्ष 2019 में भी महलगांव थाने में उसके खिलाफ चोरी का संगीन मामला दर्ज हुआ था, जिसमें पुलिस ने उसके घर पर छापेमारी कर चोरी का सामान बरामद किया था।

सिलीगुड़ी रूट से बांग्लादेश कनेक्शन की आशंका
सिलीगुड़ी का इलाका नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की सीमाओं के समीप 'चिकन नेक' कॉरिडोर में पड़ता है। पूर्व में भी राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और बीएसएफ द्वारा सिलीगुड़ी कॉरिडोर से बांग्लादेशी जाली नोट गिरोहों के कई मॉड्यूल पकड़े जा चुके हैं। ऐसे में भारतीय सुरक्षा और खुफिया एजेंसियां भी सतर्क हो गई हैं और इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि कहीं बरामद जाली नोटों की खेप सीमा पार बांग्लादेश से तो तस्करी कर भारत नहीं लाई गई थी।

एजेंसियों के कान खड़े
महलगांव थानाध्यक्ष ब्रजेश कुमार ने बताया कि मामले की कड़ियां तेजी से जोड़ी जा रही हैं। फरार चल रहे मुख्य बिचौलिए मो. आफताब और सिलीगुड़ी के सप्लायर आलम की गिरफ्तारी के लिए विशेष पुलिस टीम लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। उनकी गिरफ्तारी के बाद ही इस सिंडिकेट के अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों का पूरी तरह खुलासा हो सकेगा।

 

Aditya
Author: Aditya

Share करें

✓ Link copy हो गया!

Leave a Comment

और पढ़ें

error: Content is protected !!