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भवभूति अलंकरण से सम्मानित होंगे गिरधर राठी और राजेन्द्र दानी

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भोपाल
 नर्मदापुरम जिले के पिपरिया में जन्मे प्रख्यात कवि, संपादक,अनुवादक और मानवाधिकार कार्यकर्ता गिरधर राठी तथा जबलपुर निवासी वरिष्ठ कथाकार एवं संपादक राजेन्द्र दानी को वर्ष 2026 का मप्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन का प्रतिष्ठित भवभूति अलंकरण प्रदान किया जाएगा। अलंकरण के लिए गठित निर्णायक मण्डल में वरिष्ठ साहित्यकार सत्यमोहन वर्मा, रामप्रकाश त्रिपाठी तथा प्रो इकबाल मसूद शामिल थे। 

राठी साहित्य अकादमी की हिन्दी पत्रिका समकालीन भारतीय साहित्य (1992-2003) और प्रतिपक्ष के संपादक रह चुके हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय पत्रिका अल्टरनेटिव्स (1978-1991) के प्रबंध संपादक और चाइना रिपोर्ट और जनयुग के संपादकीय सहायक का दायित्व भी निभाया है। उनके तीन काव्य संग्रह, एक यात्रा वृत्तांत और आलोचना की दो पुस्तकें  प्रकाशित हैं।उन्होंने डेनियल वेइसबोर्ट के साथ 'सर्वाइवल : एन एक्सपीरियंस एंड एन एक्सपेरिमेंट इन ट्रांसलेटिंग मॉडर्न हिन्दी पोएट्री' का सह-संपादन किया है। अनेक भारतीय तथा विदेशी कवियों की रचनाओं का अनुवाद भी राठी ने किया है। वे एमनेस्टी इंटरनेशनल की भारत शाखा के सचिव भी रहे हैं। गिरधर राठी, ओमप्रकाश साहित्य सम्मान तथा कृष्णा सोबती की जीवनी पर आधारित पुस्तक 'दूसरा जीवन' के लिए रज़ा फैलोशिप से सम्मानित हैं। 

दूसरी ओर राजनांदगांव में जन्मे और लगभग चालीस वर्षों से कथा-लेखन में अनवरत सक्रिय शीर्षस्थ कथाकार राजेन्द्र दानी वर्गीय चेतना और प्रगतिशील-जनवादी मूल्यों के साथ गहरी प्रतिबद्धता के लिये जाने जाते हैं। वे लंबे समय तक हिन्दी कथा साहित्य की महत्वपूर्ण पत्रिका 'पहल' के सम्पादन से जुड़े रहे। उनके 17 कहानी संग्रह, दो उपन्यास और कथेतर गद्य की एक पुस्तक प्रकाशित है। विगत 4 वर्षों से वे साहित्यिक पत्रिका अन्विति का सम्पादन और प्रकाशन कर रहे हैं। उन्हें मप्र शासन के अखिल भारतीय मुक्तिबोध सम्मान सहित अनेक सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।

Aditya
Author: Aditya

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