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चित्रकूट के 1000 से अधिक गांवों में सामाजिक बदलाव की तैयारी, DRI करेगा समाजशिल्पी दंपतियों की भर्ती; हर महीने मिलेगा ₹18 हजार मानदेय…..

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पांच साल गांवों में रहकर गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा और बीमारी दूर करने की दिशा में करेंगे काम, पति-पत्नी दोनों का स्नातक होना अनिवार्य; 18 नवंबर को आरोग्यधाम में होगा साक्षात्कार…

चित्रकूट। मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश की सीमा से लगे चित्रकूट क्षेत्र के 1000 से अधिक गांवों में सामाजिक और ग्रामीण विकास की नई पहल को आगे बढ़ाने के लिए दीनदयाल शोध संस्थान (DRI) समाजशिल्पी दंपतियों की भर्ती कर रहा है। चयनित पति-पत्नी को पांच वर्षों तक गांवों में रहकर ग्रामीणों के साथ मिलकर गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा और बीमारी जैसी समस्याओं को दूर करने की दिशा में काम करना होगा। इस योजना का उद्देश्य गांवों को आत्मनिर्भर, स्वावलंबी, हरा-भरा और विवादमुक्त बनाना है, ताकि ग्रामीण स्वयं अपनी समस्याओं का समाधान करने में सक्षम हो सकें।

संस्थान की इस पहल में समाजशिल्पी दंपती केवल योजनाओं को लागू करने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि गांव के लोगों के बीच रहकर उन्हें संगठित करेंगे और सामूहिक प्रयासों से सामाजिक बदलाव की राह तैयार करेंगे। ग्रामीण विकास, कृषि, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल प्रशिक्षण और सामुदायिक भागीदारी जैसे क्षेत्रों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

पति-पत्नी दोनों का स्नातक होना जरूरी, आयु 25 से 35 वर्ष… समाजशिल्पी दंपती योजना के लिए निर्धारित योग्यता के अनुसार पति और पत्नी दोनों का स्नातक होना अनिवार्य है। दंपती की आयु 25 से 35 वर्ष के बीच होनी चाहिए तथा उनके दो से अधिक बच्चे नहीं होने चाहिए। चयनित दंपती को संबंधित गांव में पूर्णकालिक रूप से रहकर कार्य करना होगा। इसके साथ ही ग्रामीणों के साथ मिलकर सामाजिक विकास के कार्य करने की इच्छा और प्रतिबद्धता भी जरूरी होगी।

हर महीने 18 हजार रुपये मानदेय, काम के आधार पर बढ़ेगी राशि…. योजना के तहत निर्धारित मानदेय भी तय किया गया है। प्रकाशित जानकारी के अनुसार समाजशिल्पी दंपती को प्रतिमाह 18 हजार रुपये मानदेय मिलेगा। वहीं समाजशिल्पी के अलग पद के लिए प्रतिमाह 10 हजार रुपये निर्धारित किए गए हैं।

इसके अतिरिक्त एक वर्ष तक सफलतापूर्वक कार्य पूरा करने पर समाजशिल्पी दंपती का मानदेय बढ़ाकर 20 हजार रुपये प्रतिमाह और समाजशिल्पी का मानदेय 12 हजार रुपये प्रतिमाह किए जाने का प्रावधान बताया गया है।

18 नवंबर को आरोग्यधाम चित्रकूट में साक्षात्कार…. समाजशिल्पी दंपती योजना के लिए साक्षात्कार 18 नवंबर 2026 को सुबह 11 बजे से आरोग्यधाम परिसर, चित्रकूट, जिला सतना (मध्यप्रदेश) में आयोजित किया जाएगा। इच्छुक अभ्यर्थियों को आवेदन पत्र और अपने मूल शैक्षणिक अभिलेखों के साथ निर्धारित समय पर उपस्थित होना होगा।

गांवों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए छह प्रमुख क्षेत्रों में होगा काम….. दीनदयाल शोध संस्थान का ग्रामीण विकास मॉडल छह प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित है। इनमें ग्रामीण विकास, कृषि एवं रोजगार, शिक्षा एवं स्वास्थ्य, कौशल विकास, समाजशिल्पी दंपती योजना और सामुदायिक भागीदारी शामिल हैं।

इनके माध्यम से गांवों को गरीबी, बेरोजगारी और अशिक्षा से मुक्त करने, बेहतर खेती और जल संरक्षण को बढ़ावा देने, ग्रामीण युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने, बच्चों की शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने तथा महिलाओं और युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देने का प्रयास किया जाएगा।

संस्थान की सोच है कि गांव के लोग स्वयं अपने विकास की जिम्मेदारी उठाएं और ऐसे अनुकरणीय परिवार तथा सामाजिक व्यवस्थाएं तैयार हों, जिन्हें देखकर दूसरे गांव भी प्रेरणा ले सकें।

नानाजी देशमुख ने रखी थी ग्रामीण स्वावलंबन की नींव….. दीनदयाल शोध संस्थान की स्थापना वर्ष 1968 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक और भारतीय जनसंघ के प्रमुख संगठनकर्ताओं में शामिल नानाजी देशमुख ने की थी। उनका पूरा नाम चंडिकादास अमृतराव देशमुख था। उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद के विचारों को सामाजिक और ग्रामीण विकास के व्यावहारिक स्वरूप में उतारने का प्रयास किया।

नानाजी देशमुख ने अटल बिहारी वाजपेयी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के साथ काम किया। वर्ष 1977 में जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद उन्हें केंद्रीय मंत्री बनाए जाने का प्रस्ताव मिला, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया। वर्ष 1978 में सक्रिय राजनीति से संन्यास लेकर स्वयं को ग्रामीण विकास और सामाजिक कार्यों के लिए समर्पित कर दिया।

उन्होंने चित्रकूट को अपनी कर्मभूमि बनाया और यहां ग्रामीण स्वावलंबन का ऐसा मॉडल विकसित करने का प्रयास शुरू किया, जिसमें गांव के लोग अपनी समस्याओं का समाधान स्वयं कर सकें। उनके योगदान के लिए उन्हें वर्ष 1999 में पद्म विभूषण और वर्ष 2019 में मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

1996 में शुरू हुई थी समाजशिल्पी दंपती योजना…. चित्रकूट में समाजशिल्पी दंपती योजना की शुरुआत वर्ष प्रतिपदा 1996 में की गई थी। इसका मूल उद्देश्य शिक्षित दंपतियों को गांवों में रहकर सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बनाना है। दंपती ग्रामीण परिवारों के साथ रहकर शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, रोजगार और सामाजिक समरसता के क्षेत्र में काम करते हैं।

चित्रकूट से शुरू हुआ ग्रामीण स्वावलंबन का यह प्रयोग अब एक हजार से अधिक गांवों तक सामाजिक बदलाव की संभावनाएं लेकर आगे बढ़ रहा है। ऐसे में समाजशिल्पी दंपतियों की नई भर्ती को संस्थान के ग्रामीण विकास अभियान की एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।

Amit Mishra
Author: Amit Mishra

Group Editor, Rewanchal Roshni News Group

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