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झोटा मर्डर केस में बढ़ा विवाद, परिवार की मांगों पर CM मान ने बुलाई हाईलेवल मीटिंग

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मानसा
मानसा में एंटी ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर झोटा की हत्या के चौथे दिन भी परिवार और लोगों का धरना जारी है। परिवार सीएम भगवंत मान और डीजीपी गौरव यादव के इस्तीफे, सीबीआई जांच समेत 5 मांगों पर अड़ा हुआ है। प्रशासन कई बार परिवार से बातचीत कर चुका है, लेकिन अभी कोई निर्णय नहीं हुआ। 

पिता भीम सिंह का कहना है कि मांगें पूरी होने के बाद ही बेटे की डेडबॉडी लेंगे। अभी तक शव का पोस्टमॉर्टम भी नहीं हुआ है। शव मानसा के सिविल अस्पताल में रखा हुआ है।

गुरुवार में हत्या के विरोध में पंजाब बंद रहा। प्राइवेट स्कूल-कॉलेज के साथ बाजार बंद रहे। किसान संगठनों ने नेशनल हाईवे जाम किए। पुलिस ने किसान नेताओं को हिरासत में भी लिया। लुधियाना में प्रदर्शन के दौरान CM मान का होर्डिंग उतारने पोल पर चढ़े युवक की करंट लगने से मौत हो गई।

उधर, मामला बढ़ता देख सीएम मान ने आज हाई लेवल मीटिंग बुलाई है। वहीं, मानसा लक्ष्मी नारायण मंदिर में शहर के लोगों और सीनियर पुलिस अधिकारियों की भी मीटिंग तय है।

झोटा की 13 अक्टूबर को नशा बेचने का विरोध करने पर मेडिकल स्टोर मालिक अश्विनी कुमार ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। पुलिस अश्विनी कुमार के साथ उसकी पत्नी नीलम रानी और मदद करने वाले को गिरफ्तार कर चुकी है। उसे 7 दिन की पुलिस रिमांड पर लिया गया है।

मानसा के एसएसपी वैभव चौधरी ने कहा कि अश्विनी ने वारदात के बाद अपना मोबाइल फोन फेंक दिया था। अश्विनी ने आखिरी कॉल अपने चाचा को की थी, जबकि अपने बेटे को चार कॉल की थीं।

ड्रग इंस्पेक्टर से देर रात तक पूछताछ इस मामले में आरोपी मेडिकल संचालक अश्विनी कुमार के लाइसेंस रिन्यूअल को लेकर स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। संबंधित ड्रग इंस्पेक्टर नरेश की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, डायरेक्टर हेल्थ सर्विसेज और मानसा के डिप्टी कमिश्नर ने मामले से जुड़ा रिकॉर्ड तलब किया है। वहीं, ड्रग इंस्पेक्टर से देर रात तक पूछताछ किए जाने की जानकारी सामने आई है।

जांच का मुख्य बिंदु यह है कि मेडिकल संचालक के खिलाफ मामले दर्ज होने और शिकायतें मिलने के बावजूद उसके मेडिकल स्टोर का लाइसेंस बार-बार कैसे रिन्यू होता रहा। विभागीय अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि लाइसेंस रिन्यूअल के दौरान संबंधित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया गया था या नहीं।

मामले में अब तक क्या-क्या हुआ…
    मेडिकल स्टोर पर गोली मारकर हत्या
: 13 अक्टूबर मानसा में मेडिकल स्टोर पर नशे की बिक्री को लेकर परविंदर सिंह झोटा और दुकान मालिक अश्विनी कुमार के बीच विवाद हुआ। झोटा फेसबुक पर लाइव थे। इसी दौरान अश्विनी ने उन पर गोलियां चला दीं। झोटा की मौत हो गई और उनके चार साथी घायल हुए।

    मुख्य आरोपी राजस्थान से गिरफ्तार: 14 अक्टूबर को पुलिस ने आरोपी अश्विनी कुमार को राजस्थान के सालासर से गिरफ्तार किया। मामले में एफआईआर दर्ज हुई। पुलिस ने एक अन्य व्यक्ति को भी आरोपी की फरारी में मदद करने के आरोप में पकड़ा।

    मेडिकल स्टोर में तोड़फोड़, घर का हिस्सा गिराया: 14 अक्टूबर को हत्या के विरोध में लोगों ने आरोपी के मेडिकल स्टोर में तोड़फोड़ कर आग लगा दी। प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर उसके घर का एक हिस्सा अवैध निर्माण का हवाला देकर गिराया।

    परिवार ने अंतिम संस्कार रोका, रखीं मांगें: झोटा के पिता भीम सिंह ने इंसाफ मिलने तक अंतिम संस्कार नहीं करने की बात कही। परिवार ने सीबीआई जांच, पीजीआई चंडीगढ़ के डॉक्टरों के बोर्ड से पोस्टमॉर्टम और मुख्यमंत्री भगवंत मान व डीजीपी गौरव यादव के इस्तीफे समेत 5 मांगें रखीं।

    पंजाब बंद, बाजार-हाईव बंद किए: 15 अक्टूबर को पंजाब बंद रखा गया। कई जगह बाजार बंद रहे और धरने हुए। किसान संगठनों, विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने बंद का समर्थन किया। स्कूल, बाजार और हाईवे बंद किए गए। झोटा के पिता ने बंद को सफल बनाने के लिए लोगों का धन्यवाद किया और अगले दिन से दुकानें खोलने की अपील की।

    पत्नी भी नामजद, थाना प्रभारी सस्पेंड: मानसा के SSP वैभव चौधरी ने बताया कि आरोपी की पत्नी नीलम रानी की भी भूमिका सामने आने के बाद उसे भी मामले में नामजद कर गिरफ्तार किया गया। थाना सिटी-2 की प्रभारी बेअंत कौर को सस्पेंड कर दिया गया। वहीं DSP हरजिंदर सिंह गिल के खिलाफ जांच के लिए DGP ऑफिस को सिफारिश की गई है।

    हाईकोर्ट पहुंचा मामला, सीबीआई जांच की मांग: हत्या की जांच सीबीआई को सौंपने के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। याचिका में पुलिस की भूमिका के साथ मेडिकल स्टोर के ड्रग लाइसेंस और आरोपी के हथियार लाइसेंस की स्वतंत्र जांच की मांग भी की गई।

मामले दर्ज होने के बाद लाइसेंस जारी किया अश्विनी के खिलाफ पांच मामले दर्ज होने के बावजूद जिला प्रशासन ने 21 अगस्त 2024 को उसका हथियार लाइसेंस जारी किया था। खास बात यह है कि लाइसेंस की सिफारिश करते समय पुलिस रिकॉर्ड में इन मामलों का उल्लेख भी किया गया था।

अश्विनी कुमार के खिलाफ वर्ष 2013 से 2026 तक कुल 6 एफआईआर दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। इनमें से दो मामलों में उसे अदालत से बरी किया जा चुका है, जबकि तीन मामले धारा 188 के तहत दर्ज होने की बात कही गई है। छठा मामला 14 अक्टूबर 2026 को झोटा हत्याकांड के संबंध में दर्ज किया गया।

जानकारी के अनुसार, अश्विनी के पास 7.62 एमएम की पिस्टल और 12 बोर की गन थी। लाइसेंस की वैधता 21 अगस्त 2024 से 20 अगस्त 2029 तक थी। उसे एक बार में 50 कारतूस खरीदने और सालभर में अधिकतम 100 कारतूस खरीदने की अनुमति भी दी गई थी।

Aditya
Author: Aditya

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