रीवा। संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय की व्यवस्थाओं को लेकर सेमरिया से कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा के एक बयान ने अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 8 सितंबर को जयस्तंभ चौराहे पर कांग्रेस के धरना-प्रदर्शन के दौरान विधायक ने पोस्टमॉर्टम व्यवस्था और शवों की सुरक्षा को लेकर बेहद गंभीर आरोप लगाए।

विधायक अभय मिश्रा ने आरोप लगाया कि यदि किसी सुंदर महिला की मौत हो जाती है और पोस्टमॉर्टम के दौरान उसके परिजन मौजूद नहीं रहते, तो कथित तौर पर उसके शव के साथ दुष्कर्म तक किया जाता है। उन्होंने पोस्टमॉर्टम के नाम पर मृतकों के परिजनों से पैसे लिए जाने के आरोप भी लगाए। हालांकि, इन गंभीर आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और अस्पताल प्रशासन अथवा संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है।

विधायक का यह बयान ऐसे समय आया है, जब संजय गांधी अस्पताल पहले से ही कई विवादों को लेकर चर्चा में है। अगस्त में प्रसूता कल्पना मिश्रा और उनके नवजात बच्चे की मौत के बाद परिजनों ने इलाज में लापरवाही के आरोप लगाए थे। मामले में दो डॉक्टर और दो नर्सिंग स्टाफ निलंबित किए गए, जबकि बाद में मेडिकल कॉलेज के डीन को भी पद से हटाया गया।
इसी बीच 5 सितंबर को 66 वर्षीय गिरिजा प्रसाद गुप्ता को मृत घोषित किए जाने के बाद परिजनों ने उन्हें शवगृह ले जाने की बात कही। परिजनों के मुताबिक वहां उनकी नब्ज चलती मिली, जिसके बाद उन्हें दोबारा अस्पताल में भर्ती कराया गया। मामले की जांच के निर्देश दिए गए हैं।
वहीं 8 सितंबर की रात रीवा कलेक्टर ने अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कुछ वरिष्ठ ड्यूटी डॉक्टरों की गैरमौजूदगी और साफ-सफाई सहित अन्य व्यवस्थाओं पर नाराजगी जताई गई।
लगातार सामने आ रहे मामलों और अब विधायक के गंभीर आरोपों के बाद पोस्टमॉर्टम प्रक्रिया, शवों की निगरानी और अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है। विधायक के आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
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