बुंदेली दिवारी, राई लोकनृत्य और ओडिसी नृत्य नाटक ने मोहा मन; 27 अक्टूबर को मैहर वाद्यवृंद और बॉलीवुड गायक श्रीराम अय्यर देंगे प्रस्तुति।
चित्रकूट। भारत रत्न राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख की जयंती एवं शरद पूर्णिमा के अवसर पर चित्रकूट के दीनदयाल परिसर में आयोजित तीन दिवसीय शरदोत्सव भारतीय संस्कृति, लोककला और आध्यात्मिक परंपराओं का साझा मंच बन रहा है। सोमवार को उत्सव की दूसरी सांस्कृतिक संध्या में बुंदेली लोकनृत्य, मराठी लोककला, योग, भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं पर आधारित ओडिसी नृत्य नाटक और भक्ति गायन की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। विभिन्न शिक्षण संस्थानों के बच्चों और देश के अलग-अलग क्षेत्रों से आए कलाकारों ने अपनी प्रतिभा के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक विरासत की विविधता को प्रस्तुत किया।
लोकनृत्यों और बच्चों की प्रस्तुतियों ने बांधा समां…. दूसरी सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत रामनाथ आश्रमशाला के बच्चों द्वारा पारंपरिक बुंदेलखंडी लोकनृत्य दिवारी की प्रस्तुति से हुई। इसके बाद सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट की ओर से काली नृत्य और सुरेंद्र पाल ग्रामोदय विद्यालय के बच्चों द्वारा नवदुर्गा मराठी लोकनृत्य प्रस्तुत किया गया।

महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कलाकारों ने राई लोकनृत्य के माध्यम से बुंदेलखंड की लोकपरंपरा की झलक दिखाई। जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग विश्वविद्यालय की टीम ने योग की प्रस्तुति दी, जबकि परमानंद आश्रम पद्धति विद्यालय के बच्चों ने पिरामिड हम वक्त बदल देंगे कार्यक्रम के जरिए अपनी प्रतिभा और सामूहिक कौशल का प्रदर्शन किया।

इन प्रस्तुतियों में स्थानीय लोकसंस्कृति, पारंपरिक कलाओं और नई पीढ़ी की रचनात्मकता का सुंदर समन्वय देखने को मिला।
ओडिसी नृत्य में जीवंत हुईं भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं…. शरदोत्सव की दूसरी शाम का प्रमुख आकर्षण भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं पर आधारित नृत्य नाटक रहा। जगन्नाथ पुरी की अभिनयना डांस अकादमी की श्रीमती रोजालिन सुंदराय के निर्देशन में ओडिशा के कलाकारों ने ओडिसी नृत्य एवं संगीत के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का मनोहारी मंचन किया।
इसके बाद अहमदाबाद से आईं आशा वैष्णव एवं उनके साथियों ने भक्ति गायन की प्रस्तुतियां दीं। पारंपरिक नृत्य, भावपूर्ण अभिनय और भक्तिमय संगीत ने सांस्कृतिक संध्या को विशेष रंग प्रदान किया।

नानाजी देशमुख की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुआ शुभारंभ…. कार्यक्रम का शुभारंभ भारत रत्न राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर संत-महात्माओं, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न संस्थानों से जुड़े गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति रही।
कार्यक्रम में तुलसी पीठ चित्रकूट के पूज्य युवराज स्वामी श्री रामचन्द्र दास, निर्मोही अखाड़ा के महंत श्री दीनदयाल दास, बजरंग आश्रम नया गांव के महंत श्री राम निहोरे दास, मत्यगजेंद्र नाथ जी के महंत श्री प्रदीप तिवारी, करह आश्रम के महंत श्री माधव दास महाराज, गायत्री शक्तिपीठ के व्यवस्थापक डॉ. रामनारायण त्रिपाठी, टाटी घाट के महंत श्री त्रिवेणी दास और चुनचुन गिरी आश्रम के महंत श्री भास्कर दास उपस्थित रहे।
इसके अलावा चित्रकूट विधायक श्री सुरेंद्र सिंह गहरवार, जिला पंचायत बांदा के अध्यक्ष श्री सुनील सिंह पटेल, जिला पंचायत चित्रकूट के अध्यक्ष श्री अशोक जाटव, खंडवा की महापौर श्रीमती अमृता यादव, नगर परिषद चित्रकूट की अध्यक्ष सुश्री साधना पटेल, भाजपा बांदा के जिला अध्यक्ष श्री कल्लू राजपूत, प्रबल श्रीवास्तव, मैहर के पुलिस अधीक्षक श्री अवधेश सिंह, अखिल भारतीय समाज सेवा संस्थान के निदेशक डॉ. गोपाल भाई, महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के पूर्व कुलगुरु प्रो. भरत मिश्रा, सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. स्वप्ना वर्मा, भारत सरकार के आईटी मंत्रालय के सलाहकार श्री देवेंद्र कुशवाहा, बिरला हॉस्पिटल सतना के निदेशक डॉ. संजय माहेश्वरी, तुलसी शोध संस्थान की निदेशक श्रीमती मंजुषा राजस जोहरी, बॉस कला लघु एवं कुटीर उद्योग के श्री कैलाश बसोर, लायंस क्लब के मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ गवर्नर श्री सज्जी जॉन, मध्य प्रदेश के पूर्व महाधिवक्ता श्री पूरन कुलश्रेष्ठ तथा दीनदयाल शोध संस्थान के सचिव श्री भूपेंद्र मलिक सहित अन्य गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

अंतिम दिन मैहर वाद्यवृंद और श्रीराम अय्यर की प्रस्तुति….. शरदोत्सव के तीसरे दिन मंगलवार, 27 अक्टूबर को सांस्कृतिक कार्यक्रमों की अगली कड़ी में शासकीय संगीत महाविद्यालय मैहर के कलाकार ऐतिहासिक ‘मैहर वाद्यवृंद’ की जुगलबंदी प्रस्तुत करेंगे। इसके बाद मुंबई के बॉलीवुड पार्श्व गायक श्रीराम अय्यर सुगम संगीत की प्रस्तुति देंगे।
दोनों प्रस्तुतियां दीनदयाल परिसर में शाम 7 बजे से आयोजित होंगी। नानाजी देशमुख की स्मृति से जुड़े इस आयोजन में लोककला, शास्त्रीय संगीत, भक्ति और सांस्कृतिक परंपराओं के माध्यम से चित्रकूट की सांस्कृतिक पहचान को मंच प्रदान किया जा रहा है।









