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दलाल स्ट्रीट पर बड़ी गिरावट, 4 घंटे में डूबे 4 लाख करोड़ रुपये; निवेशकों में हड़कंप

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मुंबई 

भारतीय शेयर बाजार में बुधवार, 22 जुलाई को 'भूकंप' के झटके सुबह से ही लगने शुरू हो गए थे। दोपहर तक यह झटका इतना तेज लगा कि सेंसेक्स-निफ्टी जैसे प्रमुख सूचकांकों में 1% की गिरावट आई, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में इससे भी ज्यादा गिरावट रही। चार घंटे के ट्रेड में बीएसई के निवेशकों को करीब 4 लाख करोड़ का नुकसान झेलना पड़ा। यहां लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 4,80,34,340.27 रुपये रह गया। इससे पहले 21 जुलाई को कुल मार्केट कैप 4,84,29,839.10 रुपये था।

आज दोपहर तक सेंसेक्स 800 अंक से ज्यादा (लगभग 1%) टूटकर 76,641.19 के निचले स्तर पर पहुंच गया। वहीं निफ्टी 50 अपने अहम समर्थन स्तर 24,000 से नीचे फिसलकर 23,961.40 तक आ गया, जो 200 अंकों (करीब 1%) की गिरावट थी। निफ्टी मिडकैप 100 और स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में करीब डेढ़ प्रतिशत तक की गिरावट आई।

शेयर बाजार में आज की गिरावट के 5 कारण

1. ट्रंप का टैरिफ: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 1 अगस्त 2028 से अमेरिका आने वाली सभी जेनेरिक दवाओं पर 100% टैरिफ लगाने का ऐलान किया, जो अगले साल से बढ़कर 200% हो जाएगा। इसके अलावा, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने संकेत दिया कि कई और देशों पर जल्द ही नए टैरिफ लग सकते हैं। इससे बाजार की धारणा कमजोर हुई। 

2. अमेरिका-ईरान संघर्ष का बढ़ना: ईरान ने कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन हमला किया, जबकि अमेरिका ने ईरान के परमाणु संयंत्रों के पास हमले तेज कर दिए। ईरान ने चेतावनी दी कि अगर हमले जारी रहे तो संघर्ष और फैलेगा। इस तनाव से तेल की कीमतें बढ़ रही हैं, जो भारत जैसे बड़े ऑयल इंपोर्टर देश के लिए चिंता का विषय है।

3. तेल की कीमतें 92 डॉलर प्रति बैरल के पार: लगातार चौथे दिन तेल की कीमतें बढ़ीं और ब्रेंट क्रूड 92.67 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो इस साल 11 जून के बाद सबसे ऊंचा स्तर है। इससे महंगाई बढ़ने और ब्याज दरों में और सख्ती होने का डर पैदा हो गया है।

4. रुपये का कमजोर होना: बुधवार को शुरुआती कारोबार में रुपया 11 पैसे टूटकर 96.36 प्रति डॉलर पर आ गया। तेल की ऊंची कीमतों और अमेरिका-ईरान तनाव के कारण डॉलर की मांग बढ़ी, जिससे रुपये पर दबाव बना। इससे भारत के आयात बिल और महंगाई की चिंता और बढ़ गई है।

5. डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी: डॉलर इंडेक्स 101 के ऊपर है और अमेरिकी 10-साल के बॉन्ड की यील्ड 4.545% से बढ़कर 4.635% हो गई है। जब डॉलर और बॉन्ड यील्ड बढ़ते हैं, तो विदेशी निवेशक भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं से अपना पैसा निकालकर अमेरिकी सुरक्षित निवेशों में लगाना शुरू कर देते हैं, जिससे शेयर बाजार पर बिकवाली का दबाव बढ़ता है।

Aditya
Author: Aditya

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