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NEET पर तमिलनाडु विधानसभा का बड़ा फैसला, परीक्षा खत्म करने का प्रस्ताव पास; छात्रों की मौतों का जिक्र

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चेन्नई 

NEET पेपर लीक के बाद इस परीक्षा को लेकर तमाम तरह के सवाल उठने लगे थे और सबसे ज्यादा सवाल उठाने वाले राज्यों में एक बार फिर तमिलनाडु का नाम शामिल था. तमिलनाडु पिछले कई सालों से NEET परीक्षा का विरोध करता आया है और अब एक बार फिर राज्य में नीट को खत्म करने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली है. तमिलनाडु के स्वास्थ्य मंत्री केजी अरुणराज ने नीट खत्म करने के मुद्दे पर राज्य विधानसभा में प्रस्ताव पेश किया, जिसके बाद इसे पारित किया गया. जोसेफ विजय सरकार से पहले स्टालिन सरकार ने भी ऐसा ही एक प्रस्ताव पारित किया था। 
 
NEET खत्म करने की बताई वजह 
विधानसभा में नीट-विरोधी प्रस्ताव पेश करते हुए मंत्री अरुणराज ने ‘पेपर लीक, युवाओं की जान जाने और छात्रों का भरोसा टूटने' का जिक्र किया, उन्होंने कहा, "नीट ने छात्रों का ध्यान स्कूल के पाठ्यक्रम से हटाकर सिर्फ कोचिंग पर केंद्रित कर दिया है. नीट की वजह से कोचिंग सेंटर की संख्या में बढ़ोतरी हुई है और वे बहुत अधिक फीस वसूल रहे हैं. नीट ग्रामीण और सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े छात्रों के लिए मेडिकल शिक्षा के अवसरों को गंभीर रूप से प्रभावित करता है. तमिलनाडु लगातार जोर देती रही है कि नीट सामाजिक न्याय, समानता, राज्यों के अधिकार के खिलाफ है। 

सीएम विजय भी कर चुके हैं विरोध
नीट पेपर लीक के बाद सबसे ज्यादा आक्रामक रुख तमिलनाडु के नए सीएम जोसेफ विजय उर्फ थलापति विजय का था. विजय ने कई बार कहा कि इस परीक्षा से गरीब छात्रों को नुकसान हो रहा है और छात्रों को 12वीं के नंबरों के आधार पर मेडिकल सीटें मिलनी चाहिए. उनका कहना है कि राज्य सरकार को ये छूट देनी चाहिए कि वो अपनी सरकारी सीटों पर राज्य के मेधावी छात्रों को एडमिशन दे सकें। 

तमिलनाडु में क्यों होता है नीट का विरोध?
तमिलनाडु में बाकी राज्यों की तरह पहले 12वीं के नंबरों के आधार पर ही मेडिकल सीट मिल जाती थी, लेकिन नीट के आने के बाद सब कुछ बदल गया. इसी दौरान अनिता नाम की एक गरीब लड़की का सपना भी अधूरा रह गया. इस लड़की ने 12वीं बोर्ड परीक्षा में 98% नंबर हासिल किए, लेकिन नीट के चलते उसे सरकारी सीट नहीं मिल पाई. ये मामला सुप्रीम कोर्ट भी गया, लेकिन बाद में दिहाड़ी मजदूर पिता का सपना अधूरा रहने के चलते अनिता ने खुदकुशी कर ली. इस घटना के बाद पूरे राज्य में हिंसक प्रदर्शन हुए और नीट के खिलाफ माहौल बन गया। 

इसके बाद से ही तमिलनाडु में हर राजनीतिक दल के लिए ये एक बड़ा मुद्दा रहा है. इससे नेता सीधे गरीबों और मध्यम वर्गीय परिवारों को टारगेट करते हैं. उनका कहना है कि पहले की तरह राज्यों को अपनी मेडिकल सीटों के लिए एडमिशन देने की छूट दी जाए। 

Aditya
Author: Aditya

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