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सेंट्रल जेल में फिर नशे की एंट्री की कोशिश, प्रहरी निलंबित; सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल, गांजा कांड के बाद अब तंबाकू पुड़िया के साथ प्रहरी पकड़ा गया, आखिर जेल की दीवारों को कौन बना रहा कमजोर?…….

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फ़ाइल फोटो……

सतना। अपराधियों को सुधारने और कानून व्यवस्था की मजबूती का प्रतीक मानी जाने वाली सेंट्रल जेल एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। हाल ही में गांजा सप्लाई मामले में कार्रवाई के बाद अब एक प्रहरी के तंबाकू की पुड़िया के साथ पकड़े जाने से जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

जानकारी के अनुसार शनिवार सुबह ड्यूटी के दौरान प्रहरी बनवारी लाल जाटव की जांच की गई। तलाशी में उसके पास से बेल्ट के नीचे टेप में लपेटकर छिपाई गई तंबाकू की पुड़िया बरामद हुई। इसके बाद जेल प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उसे निलंबित कर विभागीय जांच शुरू कर दी।

मामला केवल 10-12 ग्राम तंबाकू का नहीं है, बल्कि उस व्यवस्था का है जिसके तहत पूरी तरह प्रतिबंधित सामग्री जेल परिसर तक पहुंचने का प्रयास करती है। सवाल यह है कि यदि नियमित जांच में एक प्रहरी पकड़ा जा सकता है तो पहले ऐसे कितने प्रयास सफल हुए होंगे और कितनी सामग्री जेल के भीतर पहुंची होगी? यह जांच का विषय है।

बीते दिनों इसी जेल में गांजा सप्लाई के मामले में एक एएसआई पर भी कार्रवाई हुई थी। लगातार सामने आ रहे मामलों से यह स्पष्ट होता है कि समस्या केवल किसी एक कर्मचारी तक सीमित नहीं है, बल्कि सुरक्षा तंत्र की प्रभावशीलता पर भी प्रश्नचिह्न लग रहे हैं। जेल प्रशासन की सख्ती के दावों के बावजूद प्रतिबंधित सामग्री बार-बार जेल के भीतर पहुंचाने की कोशिश होना चिंताजनक है।

जेल से जुड़े जानकारों का कहना है कि तंबाकू, गांजा और अन्य प्रतिबंधित वस्तुएं जेल के भीतर केवल नशे की समस्या नहीं पैदा करतीं, बल्कि इनके माध्यम से अवैध नेटवर्क और प्रभावशाली बंदियों की पकड़ भी मजबूत हो सकती है। ऐसे में हर छोटी बरामदगी को गंभीरता से देखना आवश्यक है।

उठ रहे हैं बड़े सवाल…गांजा कांड के बाद भी प्रतिबंधित सामग्री अंदर पहुंचाने की कोशिश क्यों जारी है?

क्या सुरक्षा जांच प्रणाली में कहीं न कहीं खामियां बनी हुई हैं?

पकड़े गए मामलों के अलावा कितने प्रयास सफल हुए होंगे?

प्रतिबंधित सामग्री आखिर किस बंदी तक पहुंचाई जानी थी?

क्या विभागीय कार्रवाई के साथ सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा भी होगी?

जेल प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है, लेकिन लगातार सामने आ रही घटनाओं ने यह बहस जरूर छेड़ दी है कि क्या केवल निलंबन से समस्या खत्म होगी या फिर जेल सुरक्षा तंत्र में व्यापक सुधार और जवाबदेही तय करने की जरूरत है। फिलहाल सेंट्रल जेल एक बार फिर कठघरे में है और लोगों की नजर जांच के नतीजों पर टिकी हुई है।

Amit Mishra
Author: Amit Mishra

Group Editor, Rewanchal Roshni News Group

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