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140 साल पुरानी परंपरा, रज संक्रांति पर अंगारों पर भक्त चले

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 खरसावां
चिलचिलाती धूप में खरसावां के गीतिलोता स्थित शिव मंदिर में आस्था और  परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला. सोमवार को रज संक्रांति के मौके पर सैकड़ों शिव भक्तों (भोक्ताओं) ने दहकते अंगारों पर नंगे पांव चल कर अपनी हठभक्ति व अटूट श्रद्धा का परिचय दिया. दोपहर करीब एक बजे तेज तेज धूप व हिट वेब के बीच भक्ताओं ने वर्षों से चली आ रही इस परंपरा को उत्साह के साथ निभाया. भक्ताओं ने रविवार से व्रत रख कर यहां मंदिर परिसर में भगवान शिव की पूजा अर्चना की. फिर सोमवार को खुले आसमान के नीचे सुबह दस बजे से ही सुखी लकड़ियों को जला कर अंगार तैयार किया. दोपहर करीब एक बजे ढ़ोल-नगाड़ों की थाप पर जलते अंगरों में नंगे पांव चले.

आस्था की इस परंपरा को निभाने में युवा भी आगे रहे
हठभक्ति की इस परंपरा में युवाओं की भागीदारी भी काफी बड़ी रही. सबसे पहले जलते अंगारों पर चलकर अपनी आस्था प्रकट की और फिर मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक किया. ढोल-नगाड़ों की धुन पर  पूरे उत्साह के साथ इस धार्मिक अनुष्ठान में शामिल हुए. भोक्ताओं ने अंगारों पर चलकर अपनी मन्नत पूरी होने की खुशी जाहिर की. श्रद्धालुओं ने बताया कि भगवान शिव के प्रति अटूट विश्वास ही उन्हें यह शक्ति प्रदान करता है.

शरीर को कष्ट देकर मिलती है आत्मिक शांति
भक्ति, संस्कृति और लोक परंपराओं के अद्भुत संगम के बीच संपन्न हुए इस आयोजन ने एक बार फिर क्षेत्र की समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर दिया. हठभक्ति में शामिल भक्तों का कहना है कि शरीर को कष्ट देकर उन्हें मानसिक और आत्मिक शांति मिलती है. उनका मानना है कि यह पूरी प्रक्रिया भगवान शिव को समर्पित है और उनकी कृपा से ही भक्त बिना किसी नुकसान के आग पर चल पाते हैं. भोक्ताओं के अनुसार वर्षों से इस परंपरा का निर्वहन किया जा रहा है, लेकिन आज तक किसी भक्त को आग पर चलने से कोई गंभीर नुकसान नहीं हुआ. श्रद्धालुओं का कहना है कि न तो किसी को गंभीर जलन की समस्या हुई और न ही किसी को इलाज की जरूरत पड़ी. भक्त इसे भगवान की महिमा और आस्था की शक्ति मानते हैं.

140 वर्षों से निभाई जा रही है परंपरा
गीतिलोता के शिव मंदिर परिसर में अंगारों में चलने के यह भक्ति की परंपरा वर्षो पुरानी है. स्थानीय लोगों के साथ 140 वर्षों से भी अधिक पुरानी है. हर वर्ष भक्त रज संक्रांति के मौके पर यहां आग पर चल कर अपनी हठ भक्ति को प्रदर्शित करते है. भोक्ताओं की मानें तो हठ भक्ति को पारण करने में मन व आत्मा को बेहद सुकुन मिलता है. वर्षो से इस गांव चली आ रही यह परंपरा अब भी पूरे उत्साह के साथ हर वर्ष पूरा किया जा रहा है. भक्तों के अनुसार पूरी प्रक्रिया ही भगवान को समर्पित है.

हजारों श्रद्धालुओं ने देखा भक्ति का अनोखा दृश्य
गीतिलोता के शिव मंदिर परिसर में आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान को देखने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे. मंदिर परिसर और आसपास का इलाका भक्तिमय माहौल में डूबा रहा. श्रद्धालु पूरे आयोजन के दौरान भगवान भोलेनाथ के जयकारे लगाते रहे. बड़ी संख्या में श्रद्धालु रविवार शाम से लेकर सोमवार दोपहर तक मंदिर परिसर में जमें रहे.

Aditya
Author: Aditya

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