सतना। श्री बिहारी रामलीला समाज की 130वें वर्ष की ऐतिहासिक रामलीला के तहत रावण वध के बाद पन्नीलाल चौक में प्रभु श्रीराम और उनके अनुज भरत के मिलाप का भावुक प्रसंग आयोजित हुआ। दोनों भाइयों के मिलन का दृश्य देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और पूरा परिसर जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा।

चौदह वर्ष के वनवास के बाद प्रभु श्रीराम की अयोध्या वापसी और भरत से मिलन का प्रसंग प्रेम, त्याग, भाईचारे और समर्पण की अनूठी मिसाल बना।
इस दृश्य ने पारिवारिक रिश्तों की मर्यादा और भगवान श्रीराम के आदर्शों को जीवंत कर दिया। राम-भरत मिलाप देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु और नगरवासी पहुंचे।

प्रमुख रूप से ये रहे साक्षी.…आयोजन में सीएसपी सतना, कोतवाली थाना प्रभारी, सिविल लाइन थाना प्रभारी, यातायात थाना प्रभारी, भाजपा नेत्री डॉ. स्वप्ना वर्मा, समाजसेवी रत्नाकर चतुर्वेदी, समाजसेविका शिखा शुक्ला, नरेश शुक्ला, विक्रम चौधरी और रविशंकर गौरी समेत अन्य समाजसेवी मौजूद रहे।

ये रहे मौजूद….. नवीन गुप्ता, हेमंत जैन, करण चौरसिया, राहुल जैन, रमेश कुमार गुप्ता, गोपाल डांगी, संजय वालेचा, विजय नागदेव, संतोष विश्वकर्मा, अनिल गुप्ता, अजय सेन, महंत बृजेंद्र कुमार दुबे, शैलेन्द्र कुमार दुबे, पं. हरिप्रकाश गोस्वामी, राजेश चतुर्वेदी पालन, व्यास अरुण कुमार परौहा, रामनरेश शुक्ला, नरेंद्र त्रिपाठी, सुरेश केसरवानी, शिवकुमार शुक्ला, आशुतोष दुबे, समाजसेवी संजय गुप्ता (माधवगढ़), मधुसूदन गुप्ता, अंकुर दुबे, सुधीर अग्रवाल सहित प्रचार-प्रसार प्रमुख श्याम लाल गुप्ता श्यामू और अशोक खानेचा उपस्थित रहे।

श्री बिहारी रामलीला समाज की यह ऐतिहासिक परंपरा सतना की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए है।











