Edition

भूमि नामांतरण के बदले रिश्वत मांगने वाले जावर के पटवारी धर्मेंद्र सिंह राठौर पर अभियोजन की स्वीकृति

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

भूमि नामांतरण के एवज में रिश्वत मांगने वाले जावर के पटवारी धर्मेन्द्र सिंह राठौर के विरुद्ध अभियोजन की स्वीकृति

8 हजार रुपये रिश्वत मांगने के प्रकरण में कलेक्टर सीहोर  बालागुरु के. ने जारी किया आदेश

भोपाल

राजस्व प्रशासन में अनियमितता और भ्रष्टाचार के मामलों में जिला स्तर पर निरंतर कार्रवाई की जा रही है। कलेक्टर सीहोर श्री बालागुरु के. ने जावर तहसील में पदस्थ पटवारी धर्मेन्द्र सिंह राठौर के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अभियोजन की स्वीकृति प्रदान की है। यह कार्रवाई लोकायुक्त में दर्ज शिकायत और जांच में सामने आए तथ्यों एवं उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की गई है। जारी आदेश के अनुसार, पटवारी धर्मेन्द्र सिंह राठौर के विरुद्ध शिकायतकर्ता ने लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत की थी। शिकायत में बताया गया था कि पटवारी द्वारा भूमि नामांतरण के एवज में 10 हजार रुपये रिश्वत की मांग की जा रही है।

शिकायत के सत्यापन में 8 हजार रुपये रिश्वत मांगने की पुष्टि

जारी आदेश के अनुसार शिकायत के सत्यापन के लिए निरीक्षक श्री मुकेश तिवारी द्वारा शिकायतकर्ता को डिजिटल वॉयस रिकॉर्डर उपलब्ध कराया गया।रिकॉर्डिंग के दौरान पटवारी द्वारा 8 हजार रुपये रिश्वत लेने पर सहमति व्यक्त की गई। इसके बाद स्वतंत्र पंच साक्षियों की उपस्थिति में रिकॉर्डेड वार्तालाप का अवलोकन कर प्रारंभिक पंचनामा तैयार किया गया और जावर जाकर ट्रेप की कार्रवाई की गई। रिकॉर्ड की गई बातचीत में रिश्वत की मांग स्पष्ट रूप से प्रमाणित हुई।

एफएसएल जांच में पटवारी की आवाज प्रमाणित

सीहोर जिले के तहसील कार्यालय जावर में पंचों की उपस्थिति में वॉयस रिकॉर्डर और मेमोरी कार्ड का जप्ती पंचनामा तैयार कर उन्हें सीलबंद किया गया। आरोपी पटवारी की आवाज का नमूना (वॉइस सैंपल) लेकर एफएसएल भोपाल भेजा गया। एफएसएल रिपोर्ट में रिकॉर्ड की गई आवाज को पटवारी श्री राठौर की आवाज होना प्रमाणित किया गया।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत पंजीबद्ध हुआ प्रकरण

धर्मेन्द्र सिंह राठौर, पटवारी हल्का नंबर 24, तहसील जावर, जिला सीहोर के विरुद्ध लोक सेवक के पद का दुरुपयोग करते हुए भूमि नामांतरण के लिए 8 हजार रुपये रिश्वत की मांग करने का आरोप है। प्रकरण में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया था।

उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के आधार पर कलेक्टर सीहोर श्री बालागुरु के. ने माना कि आरोपी के विरुद्ध अभियोजन की कार्रवाई के लिए पर्याप्त आधार हैं। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 19(1)(बी) एवं (सी) के प्रावधानों के तहत सक्षम प्राधिकारी की अभियोजन स्वीकृति आवश्यक होने से कलेक्टर सीहोर द्वारा पटवारी धर्मेन्द्र सिंह राठौर के विरुद्ध न्यायालय में अभियोजन चलाने की स्वीकृति प्रदान की गई है।

Aditya
Author: Aditya

Share करें

✓ Link copy हो गया!

Leave a Comment

और पढ़ें

error: Content is protected !!