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MP में 52 पटवारियों की नौकरी पर संकट, 4 सस्पेंड: कार्रवाई के विरोध में पटवारी संघ का ऐलान, ऑनलाइन राजस्व काम बंद करने की चेतावनी….

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MP में 52 पटवारियों की नौकरी पर संकट, 4 सस्पेंड: कार्रवाई के विरोध में 7 अक्टूबर से ऑनलाइन राजस्व काम बंद करेंगे पटवारी…

देवास से शुरू हुई पटवारियों पर कार्रवाई अब मध्यप्रदेश के कई जिलों तक पहुंच गई है। गुना में 4 पटवारियों को निलंबित किया गया है, जबकि जिले के सभी 52 पटवारियों को सेवा समाप्ति का नोटिस जारी किया गया है। आगर मालवा में 3 और सतना में 1 पटवारी पर कार्रवाई की जानकारी सामने आई है।

कार्रवाई के विरोध में पटवारी संघ ने 7 अक्टूबर से प्रदेशभर में ऑनलाइन राजस्व कार्यों से अलग रहने का फैसला किया है। संघ का कहना है कि जब तक दंडात्मक कार्रवाई वापस नहीं ली जाती, तब तक यह विरोध जारी रहेगा।

7 अक्टूबर से ऑनलाइन राजस्व काम से दूरी

पटवारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र बघेल ने बताया कि सीधी में संघ पदाधिकारियों ने पटवारियों पर सेवा समाप्ति, निलंबन और अन्य दंडात्मक कार्रवाई के विरोध में प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है। संघ ने राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव और सीधी कलेक्टर को पत्र भेजकर कार्रवाई वापस लेने की मांग की है।

संघ के मुताबिक, प्रदेश संगठन के निर्णय के तहत 7 अक्टूबर से पटवारी ऑनलाइन राजस्व कार्यों से अलग रहेंगे। इसके साथ ही वे सभी शासकीय ग्रुप से भी बाहर रहेंगे।

स्वामित्व योजना के काम को लेकर विवाद

पटवारी संघ का कहना है कि देवास में ‘स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन-2026’ समेत अन्य कार्यों को आधार बनाकर पटवारियों की सेवा समाप्त की जा रही है। प्रदेश के दूसरे जिलों में भी निलंबन और अन्य दंडात्मक कार्रवाई की जा रही है।

संघ के मुताबिक, स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन से जुड़ी कानूनी और व्यावहारिक समस्याओं की जानकारी शासन को पहले ही दी जा चुकी है। इसके बावजूद कार्रवाई किए जाने का संघ विरोध कर रहा है।

गुना में 4 सस्पेंड, सभी 52 को नोटिस

गुना कलेक्टर किशोर कान्याल के मुताबिक, जिले में 4 पटवारियों को निलंबित किया गया है। शासकीय कार्य नहीं करने के मामले में सभी 52 पटवारियों को सेवा समाप्ति का नोटिस जारी किया गया है।

पटवारी संघ के पदाधिकारियों के अनुसार, देवास में 2 और आगर मालवा में 3 पटवारियों की सेवा समाप्त की गई है। इससे पहले स्वामित्व योजना में निष्पादक की भूमिका का विरोध करने पर रायसेन और मंडला में भी पटवारियों पर कार्रवाई की जा चुकी है।

कार्रवाई बढ़ी तो बिना सूचना काम छोड़ने की चेतावनी

पटवारी संघ ने चेतावनी दी है कि प्रदेश के किसी भी जिले में पटवारियों के खिलाफ इसी तरह की दंडात्मक कार्रवाई दोहराई गई तो पूरा पटवारी संवर्ग बिना पूर्व सूचना के सभी राजस्व कार्यों से अलग हो जाएगा।

संघ ने प्रदेशभर में कलेक्टरों को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई वापस लेने की मांग करने का भी निर्णय लिया है।

असली विवाद क्या है?

पटवारियों का सवाल- अधिकार नहीं तो हस्ताक्षर की जवाबदेही क्यों?

स्वामित्व योजना के तहत गांवों की आबादी भूमि पर बने मकान और प्लॉट के लोगों को मालिकाना हक देने के लिए दस्तावेज तैयार कर उनकी रजिस्ट्री की जा रही है। विवाद इस बात को लेकर है कि इन दस्तावेजों में पटवारी को निष्पादक (Executant) की भूमिका दी गई है।

पटवारी संघ का तर्क है कि पटवारी न तो जमीन का मालिक है और न ही पंजीयन अधिकारी। इसके बावजूद दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने के बाद भविष्य में स्वामित्व विवाद होने पर उसे कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ सकता है। संघ इसी भूमिका को स्पष्ट करने और कानूनी सुरक्षा देने की मांग कर रहा है।

50 लाख रजिस्ट्रियों पर असर का दावा

सरकार ने स्वामित्व योजना के तहत प्रदेश में 50 लाख से ज्यादा ग्रामीण संपत्तियों की मुफ्त रजिस्ट्री का अभियान शुरू किया है। पटवारियों के निष्पादक की भूमिका से इनकार करने के कारण इस प्रक्रिया पर असर पड़ने का दावा किया जा रहा है।

पटवारी संघ के अनुसार, करीब 20 दिनों से योजना की रजिस्ट्रियां अटकी हुई हैं और इस दौरान एक भी रजिस्ट्री नहीं हो सकी। संघ का कहना है कि पटवारी सर्वे, स्थल सत्यापन, सीमांकन और रिकॉर्ड जांच जैसे कामों से पीछे नहीं हट रहे हैं। आपत्ति केवल दस्तावेज के निष्पादन की जिम्मेदारी को लेकर है।

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Kishan Gupta
Author: Kishan Gupta

journalist

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