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J&K में खेती का बदलेगा अंदाज! AI-रोबोटिक्स से कृषि और बागवानी को मिलेगी नई रफ्तार

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जम्मू
 जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कृषि और बागवानी क्षेत्र में उभरती आधुनिक चुनौतियों से निपटने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स और स्मार्ट फार्मिंग जैसी भविष्योन्मुखी तकनीकों को बड़े पैमाने पर अपनाने का जोरदार आह्वान किया है।

SKUAST-कश्मीर में AI और रोबोटिक्स पर आयोजित एक आंतरिक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि कृषि क्षेत्र अब केवल पारंपरिक खाद्य सुरक्षा की चुनौतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि नवाचार, तकनीक और आधुनिक इंजीनियरिंग हस्तक्षेपों के माध्यम से भविष्य का नेतृत्व करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

मानव बुद्धिमत्ता और एआई का होगा तालमेल
सिन्हा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर इन मुद्दों पर विचार-विमर्श के लिए उपयुक्त मंच प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र का कृषि परिदृश्य ऐतिहासिक रूप से किसानों को कठिन परिस्थितियों से निपटने और सीमित संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने के लिए प्रेरित करता रहा है।

1960 के दशक में भारत के सामने आई चुनौतियों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय देश खाद्यान्न की कमी से जूझ रहा था और आयात पर काफी हद तक निर्भर था।

कृषि वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों और इंजीनियरों ने मशीनीकरण सहित विभिन्न उपायों के जरिए कृषि क्षेत्र को बदलने और हरित क्रांति में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

उन्होंने कहा कि अब कृषि इंजीनियरिंग को उत्पादन बढ़ाने, कम संसाधनों में अधिक उपज हासिल करने, फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से कृषि और बागवानी को सुरक्षित रखने जैसी व्यावहारिक और तात्कालिक चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित करना होगा।

सिन्हा ने कहा, “इन चुनौतियों का समाधान अतीत के औजारों से नहीं किया जा सकता। हमें नए औजारों की जरूरत है।” उन्होंने आधुनिक तकनीकों और नए दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया।

खेती में महिलाओं की भूमिका को तकनीक से मिले मजबूती
उपराज्यपाल ने कहा कि हाल के महीनों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में तेजी से हुए बदलावों ने दुनियाभर में इसके प्रति रुचि और चिंताएं दोनों बढ़ाई हैं। ऐसे में यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि AI और मानव बुद्धिमत्ता एक-दूसरे के पूरक बनकर काम करें, न कि उन्हें अलग-अलग देखा जाए।

उन्होंने समाज के व्यापक वर्ग को लाभ पहुंचाने वाले नवाचारों की आवश्यकता पर भी जोर दिया। विशेष रूप से महिलाओं की भूमिका का उल्लेख करते हुए सिन्हा ने कहा कि महिला नेतृत्व वाली इंजीनियरिंग और तकनीकी पहल केवल चर्चा का विषय न रहें, बल्कि उनके ठोस और व्यावहारिक परिणाम सामने आने चाहिए।

कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी का उल्लेख करते हुए उन्होंने श्रम बल से जुड़े आंकड़ों का हवाला दिया और कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में महिलाएं कृषि गतिविधियों से जुड़ी हैं, जबकि इस क्षेत्र में काम करने वाले कई श्रमिकों को नियमित मजदूरी भी नहीं मिलती।

उपराज्यपाल ने कृषि इंजीनियरों, वैज्ञानिकों और संस्थानों से ऐसी तकनीक एवं समाधान विकसित करने का आह्वान किया जो समावेशी और संसाधन-कुशल हों तथा बदलती जलवायु परिस्थितियों में खेती को अधिक टिकाऊ बनाने में मदद करें।

Aditya
Author: Aditya

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