Edition

लक्षद्वीप में बड़ा बदलाव: तीन गुना पर्यटक, नए एयरफील्ड और INS जटायु से बढ़ी समुद्री सुरक्षा

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

नई दिल्ली
जनवरी 2024 की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लक्षद्वीप में स्नॉर्कलिंग करते हुए तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं. इसके बाद 'बॉयकॉट मालदीव' बनाम 'एक्सप्लोर लक्षद्वीप' की बहस शुरू हो गई. अब दो साल बाद इन 36 द्वीपों पर पर्यटन से लेकर बुनियादी ढांचे और सामरिक मौजूदगी तक बड़ा बदलाव दिखाई दे रहा है.

आजतक ने अगत्ती, कवरत्ती, मिनिकॉय और बिटरा पहुंचकर यह जानने की कोशिश की कि पिछले दो वर्षों में लक्षद्वीप में क्या बदला है.

असल में लक्षद्वीप 36 द्वीपों का समूह है, जो कोच्चि से करीब 220 से 440 किलोमीटर दूर स्थित है. इसका कुल भू-क्षेत्र महज 32 वर्ग किलोमीटर है. इनमें केवल 10 द्वीप- कवरत्ती, अगत्ती, अमिनी, कदमत, किल्तान, चेतलात, बिटरा, एंड्रॉट, कल्पेनी और मिनिकॉय आबाद हैं.

पीएम मोदी की यात्रा के बाद तीन गुना बढ़े पर्यटक
दशकों तक लक्षद्वीप तक पहुंच आसान नहीं थी. अगत्ती में केवल एक छोटा एयरस्ट्रिप था और साप्ताहिक जहाज यहां पहुंचने का प्रमुख जरिया थे. लेकिन अब तस्वीर बदल रही है. प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा ने लक्षद्वीप को देश के पर्यटन मानचित्र पर प्रमुखता से ला दिया. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2024 के बाद यहां पर्यटकों की संख्या तीन गुना बढ़ी है. नए बीच रिसॉर्ट, होमस्टे और हेलिकॉप्टर कनेक्टिविटी की योजनाओं पर काम हो रहा है. केंद्र सरकार ऐसे बुनियादी ढांचे पर भी जोर दे रही है, जिसका इस्तेमाल आम नागरिकों के साथ सुरक्षाबल भी कर सकें.

अगत्ती एयरफील्ड के विस्तार की योजना है, ताकि यहां बड़े ATR और सैन्य परिवहन विमान उतर सकें. वहीं मिनिकॉय में नौसेना बेस के साथ नया सैन्य-सिविल एयरफील्ड विकसित किया जा रहा है.

INS जटायु से बढ़ी नौसेना की ताकत
2023 तक लक्षद्वीप में नौसेना की प्रमुख मौजूदगी कवरत्ती स्थित INS द्वीपरक्षक और मिनिकॉय में एक छोटे नौसैनिक डिटैचमेंट तक सीमित थी. INS द्वीपरक्षक 2012 में कमीशन हुआ था, जबकि मिनिकॉय में नौसैनिक डिटैचमेंट 1980 के दशक की शुरुआत में स्थापित किया गया था.

प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के करीब दो महीने बाद 6 मार्च 2024 को तत्कालीन नौसेना प्रमुख एडमिरल आर. हरि कुमार ने मिनिकॉय में INS जटायु को कमीशन किया. इससे पुराने डिटैचमेंट को पूर्ण स्वतंत्र नौसैनिक इकाई में बदल दिया गया.

मिनिकॉय लक्षद्वीप का सबसे दक्षिणी द्वीप है और महत्वपूर्ण आठ डिग्री तथा नौ डिग्री चैनल के पास स्थित है. यह मालदीव से करीब 524 किलोमीटर और थुराकुनु द्वीप से लगभग 70 नॉटिकल मील दूर है. INS जटायु समुद्री डकैती, नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने और समुद्री मार्गों की निगरानी में अहम भूमिका निभा रहा है.

बिटरा में तीसरा नौसैनिक ठिकाना बनाने की तैयारी
करीब 200 लोगों की आबादी वाला बिटरा लक्षद्वीप का सबसे छोटा आबाद द्वीप है. सूत्रों के मुताबिक, यहां नौसेना का फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस बनाने के लिए जमीन अधिग्रहण को लेकर सोशल इम्पैक्ट असेसमेंट किया जा रहा है. इसका मकसद उत्तरी लक्षद्वीप में निगरानी की कमियों को दूर करना और नौसेना की ऑपरेशनल पहुंच बढ़ाना है.

हालांकि स्थानीय लोगों में इसे लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया है. उन्हें नौकरियों और बेहतर चिकित्सा सुविधाओं की उम्मीद है, वहीं छोटे और संवेदनशील द्वीप पर विस्थापन की चिंता भी है.

अधिकारियों के मुताबिक, इस बदलाव के पीछे पर्यटन ही नहीं बल्कि सुरक्षा भी बड़ी वजह है. हिंद महासागर क्षेत्र में चीनी रिसर्च जहाजों की मौजूदगी और सोमालिया के पास समुद्री डकैती की घटनाओं के बीच लक्षद्वीप सामरिक रूप से अहम है. मार्च 2024 में नौसेना की कमांडर्स कॉन्फ्रेंस के दौरान विमानवाहक पोत INS विक्रांत और INS विक्रमादित्य की लक्षद्वीप के पास तैनाती ने भी भारत की बढ़ती समुद्री ताकत का संदेश दिया.

Aditya
Author: Aditya

Share करें

✓ Link copy हो गया!

Leave a Comment

और पढ़ें

error: Content is protected !!