सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) एक हफ्ते के अंदर नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट-अंडरग्रेजुएट 2026 (NEET-UG 2026) पेपर लीक मामले में अपनी दूसरी और आखिरी चार्जशीट दाखिल करने वाली है लेकिन इसमें केंद्र सरकार या नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के किसी अधिकारी को आरोपी बनाए जाने की संभावना नहीं है।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट में मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों के हवाले से बताया गया कि सीबीआई की जांच में सिर्फ 13 लोगों की भूमिका का पता चल पाया है, जिनमें एनटीए के नियुक्त विषय विशेषज्ञ, कोचिंग सेंटर चलाने वाले, बिचौलिए और उम्मीदवार शामिल हैं।
'सरकारी अधिकारी नहीं बनाए जाएंगे आरोपी'
एक अधिकारी ने कहा, "एजेंसी अपनी आखिरी चार्जशीट में किसी भी सरकारी अधिकारी जिसमें एनटीए के पदाधिकारी भी शामिल हैं को आरोपी नहीं बनाएगी। पेपर लीक से जुड़े हालात की जांच में प्राइवेट लोगों के अलावा किसी और की भूमिका साबित नहीं हुई।" एक दूसरे अधिकारी ने कहा, "इसके साथ ही नीट-यूजी 2026 पेपर लीक की हमारी जांच पूरी हो जाएगी।"
3 मई को परीक्षा और 21 जून को दोबारा परीक्षा देने वाले शशांक मौर्य ने कहा, "एनटीए और शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों की मिलीभगत के बिना नीट का पेपर लीक नहीं हो सकता था। एनटीए के अधिकारी ही मुख्य दोषी हैं और उन्हें सजा मिलनी चाहिए।"
चार्जशीट में 13 आरोपियों के नाम शामिल
पेपर लीक मामले में पहली चार्जशीट 28 जुलाई को दाखिल की गई, जिसमें 13 आरोपियों के नाम शामिल हैं। इनमें एनटीए द्वारा नियुक्त तीन विषय विशेषज्ञ भी हैं बॉटनी और जूलॉजी के लिए मनीषा गुरुनाथ मंधारे, केमिस्ट्री के लिए प्रह्लाद विट्ठलराव कुलकर्णी और फिजिक्स के लिए मनीषा संजय हवलदार।
सीबीआई ने तब कहा था कि उसने सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (CFSL), गवर्नमेंट एग्जामिनर ऑफ क्वेश्चन्ड डॉक्यूमेंट्स (GEQD) और दिल्ली यूनिवर्सिटी के एक्सपर्ट्स की राय वाली रिपोर्ट जमा करने के लिए दूसरे साजिशकर्ताओं की भूमिका की जांच खुली रखी थी।
इसके बाद एजेंसी ने तीन और लोगों को गिरफ्तार किया है, जिन पर कोचिंग सेंटरों के जरिए पेपर लीक का फायदा उठाने का आरोप है। एक अधिकारी ने कहा, "इन तीनों लोगों की भूमिका और फोरेंसिक विशेषज्ञों की जांच के नतीजे, अंतिम चार्जशीट में विस्तार से बताए जाएंगे, जिसे हम एक हफ्ते के अंदर दाखिल करेंगे। यह पता लगाने के लिए गहन जांच की गई कि क्या इस लीक में एनटीए का कोई अधिकारी या कोई अन्य सरकारी अधिकारी शामिल था, लेकिन ऐसी कोई संलिप्तता नहीं पाई गई।"
सीबीआई की पहली चार्जशीट में क्या?
सीबीआई की पहली चार्जशीट के अनुसार, एनटीए ने नीट-यूजी 2026 का प्रश्न पत्र तैयार करने के कई चरणों में उन्हीं तीन विषय विशेषज्ञों का इस्तेमाल किया उनमें से एक तो प्रश्न लिखने से लेकर बैक-ट्रांसलेशन तक, सभी चार चरणों में शामिल था और उन्हें अंतिम चरण के दौरान परीक्षा के सभी चार मास्टर प्रश्न सेट देखने की अनुमति दी।
इसका असल मतलब यह था कि विशेषज्ञों को सभी चार अंतिम मास्टर प्रश्न सेट देखने का मौका मिला, जिससे उन्हें बेहद संवेदनशील सामग्री तक लंबे समय तक लगातार पहुंच मिली। सीबीआई के अनुसार, कुलकर्णी ने केमिस्ट्री के 135 सवालों और उनके जवाबों के विकल्पों को कागज के छोटे टुकड़ों पर लिखा और उन्हें गोपनीय इलाके से बाहर ले गए।
आरोप है कि मंधारे और हवलदार ने सवालों और उनके पैरामीटर्स को याद कर लिया और बाद में टेक्स्टबुक्स की मदद से उन्हें फिर से तैयार किया।
पेपर लीक के बाद परीक्षा रद, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा
12 मई को एनटीए ने 2026 नीट परीक्षा रद करने की घोषणा की। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि एक गेस पेपर के कम से कम 120 सवाल 3 मई को हुई नीट परीक्षा के पेपर से मेल खाते पाए गए थे। परीक्षा होने के एक हफ्ते बाद ही इस लीक का पता चला, जिसके कारण संसद में जबरदस्त विरोध हुआ। आखिरकार, कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले लाखों युवाओं के सड़कों पर उतरने के बाद तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा।








