संघर्ष की पगडंडी पर लगातार बढ़ते कदमों ने तय किया सफर, छात्र राजनीति से संगठन के अलग-अलग दायित्वों तक पहुंचे संजय तीर्थवानी,
अब विंध्य विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष के रूप में नई भूमिका..

GUEST OF THE WEEK | संजय तीर्थवानी…..
सतना। सार्वजनिक जीवन में पहचान किसी एक पद से नहीं बनती। उसके पीछे वर्षों का समय, संगठन के साथ काम करने का अनुभव, लोगों के बीच रहकर संवाद करने की क्षमता और छोटी-बड़ी जिम्मेदारियों को निभाते हुए आगे बढ़ने की प्रक्रिया होती है। सतना के संजय तीर्थवानी की यात्रा को इसी नजरिए से देखा जा सकता है। बाल्यकाल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा से शुरू हुआ उनका जुड़ाव छात्र राजनीति, युवा संगठन और भारतीय जनता पार्टी की विभिन्न संगठनात्मक जिम्मेदारियों से गुजरता हुआ अब विंध्य विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष पद तक पहुंचा है।

4 अक्टूबर 1989 को सतना में जन्मे संजय तीर्थवानी के पिता श्री सुदामा तीर्थवानी हैं। स्नातक शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने संगठन और सामाजिक गतिविधियों के साथ व्यवसाय को भी आगे बढ़ाया। उनके सार्वजनिक जीवन की खास बात यह रही कि यह सफर सीधे किसी बड़े पद से शुरू नहीं हुआ, बल्कि संगठन की निचली इकाइयों में काम करते हुए जिम्मेदारियां बढ़ती गईं। यही क्रम उनकी वर्तमान भूमिका की पृष्ठभूमि तैयार करता है।
शाखा में सीखा संगठन, छात्र राजनीति में मिली पहली जमीन… संजय तीर्थवानी के सार्वजनिक जीवन की शुरुआत बाल्यकाल में संघ की शाखा से हुई। शाखा के अनुशासन और संगठनात्मक वातावरण के बाद वर्ष 2007 से 2011 तक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की छात्र राजनीति से जुड़े। कॉलेज जीवन में छात्र गतिविधियों के बीच संगठन के साथ काम करने का अनुभव मिला। इसके बाद वर्ष 2011 से 2018 तक भाजयुमो के सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में काम किया।
इसके बाद जिम्मेदारियों का दायरा धीरे-धीरे बढ़ा। 2018 से 2021 तक नगर मंत्री, 2021 से 2023 तक भाजपा सतना के पूर्वी मंडल अध्यक्ष और 2023 से 2025 तक दीनदयाल मंडल अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली। वर्ष 2024 से 2026 तक भाजपा जिला उपाध्यक्ष के रूप में संगठन में काम किया। वर्ष 2026 में उन्हें विंध्य विकास प्राधिकरण का उपाध्यक्ष बनाया गया।
यह क्रम बताता है कि संगठन में उनकी यात्रा अलग-अलग स्तरों से होकर आगे बढ़ी। कार्यकर्ता से लेकर मंडल और जिला स्तर की जिम्मेदारी तथा उसके बाद प्राधिकरण की भूमिका तक पहुंचना उनके सार्वजनिक जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव है।
बूथ से शुरू हुआ जनसंपर्क का अनुभव… राजनीतिक संगठन का वास्तविक काम अक्सर बड़े मंचों से अधिक बूथ और स्थानीय स्तर पर दिखाई देता है। संजय तीर्थवानी की संगठनात्मक गतिविधियों में भी बूथ प्रबंधन, कार्यकर्ता संवाद और जनसंपर्क लगातार जुड़े रहे।
वर्ष 2022 के नगर निगम चुनाव में बूथ प्रबंधन, जनसंपर्क और चुनावी रणनीति से संबंधित कार्यों में उन्होंने भूमिका निभाई। विधानसभा चुनाव 2023 के दौरान सतना जिले की विभिन्न विधानसभा सीटों पर पार्टी प्रत्याशियों के समर्थन में संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय रहे। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में सतना संसदीय क्षेत्र में जनसंपर्क, बूथ स्तरीय बैठकें और प्रवक्ता प्रशिक्षण जैसे कार्यों के समन्वय से जुड़े रहे।
संगठन के बदलते स्वरूप के साथ तकनीक को भी संगठनात्मक गतिविधियों से जोड़ने पर काम किया। ‘संगठन 2.0’ और ‘स्मार्ट ऐप’ जैसे डिजिटल अभियानों को बूथ स्तर तक पहुंचाने तथा कार्यकर्ताओं को तकनीकी माध्यमों से जोड़ने की गतिविधियों में भी उनकी भूमिका रही।
पद से ज्यादा जमीन पर काम करने का अनुभव…. संजय तीर्थवानी के सफर में संगठनात्मक पदों की सूची जरूर है, लेकिन इस यात्रा का दूसरा पक्ष उन गतिविधियों का है, जिनमें कार्यकर्ताओं और आम लोगों के बीच लगातार संपर्क बना रहा। बूथ बैठकें, सदस्यता अभियान, युवा संवाद और संगठन विस्तार जैसे काम राजनीतिक संगठन के जमीनी ढांचे से जुड़े होते हैं।
उनके परिचय के अनुसार सतना विधानसभा क्षेत्र के 45 वार्ड और 22 पंचायतों से जुड़े बूथों पर कार्यकर्ता बैठकों और संगठन विस्तार की गतिविधियों में वे सक्रिय रहे। युवाओं को संगठन से जोड़ने और नए कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियों के लिए तैयार करने पर भी उन्होंने काम किया।
जब बाढ़ आई तो संगठन से आगे सेवा का सवाल था… अगस्त 2026 में चित्रकूट क्षेत्र में भारी बारिश और बाढ़ की स्थिति के दौरान संजय तीर्थवानी की टीम राहत कार्यों में सक्रिय रही। जलमग्न क्षेत्रों में नावों के माध्यम से प्रभावित परिवारों तक भोजन और जरूरी सामग्री पहुंचाई गई। राहत रथ के माध्यम से दूध, पेयजल, ब्रेड-बिस्किट, स्नैक्स, कपड़े, तिरपाल और कंबल सहित राहत सामग्री पहुंचाने का काम किया गया।
आपदा की परिस्थितियों में राहत कार्य किसी राजनीतिक पद की औपचारिक जिम्मेदारी नहीं होती, बल्कि तत्काल जरूरत के अनुसार काम करने की स्थिति होती है। इसी दौरान प्रभावित बस्तियों में भोजन और आवश्यक सामग्री वितरण का काम उनकी टीम द्वारा किया गया।
कोविड महामारी के दौरान भी जरूरतमंद परिवारों तक राशन, भोजन और दवाइयां पहुंचाने की गतिविधियों में उनकी भागीदारी रही। इन सेवा कार्यों के लिए उन्हें ‘कोरोना कर्मवीर’ सम्मान से सम्मानित किए जाने की जानकारी उनके परिचय में दी गई है।
सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों से भी जुड़ाव….. संजय तीर्थवानी का जुड़ाव केवल राजनीतिक संगठन तक सीमित नहीं रहा। सिंधी समाज के विभिन्न आयोजनों में उन्होंने समन्वय की भूमिका निभाई। भोपाल में आयोजित अखिल भारतीय सिंधी समाज के सम्मेलन में मुख्य समन्वयक के रूप में काम करने की जानकारी दी गई है।
चित्रकूट स्थित सिंधी दीनदयाल शोध संस्थान से भी वे लंबे समय से जुड़े रहे हैं। सामाजिक गतिविधियों के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में सहभागिता उनके सार्वजनिक जीवन का एक और पक्ष है। बैंकॉक में आयोजित विश्व हिंदू कांग्रेस 2023 में सहभागिता की जानकारी भी उनके परिचय में शामिल है।
अब संगठन की जगह सामने है विंध्य के विकास की बड़ी जिम्मेदारी…. वर्ष 2026 में संजय तीर्थवानी को विंध्य विकास प्राधिकरण का उपाध्यक्ष बनाया गया। यह उनके सार्वजनिक जीवन में अब तक की सबसे अलग तरह की जिम्मेदारी है। संगठन में काम करते हुए जहां प्राथमिकता कार्यकर्ताओं, बूथ और जनसंपर्क से जुड़ी रही, वहीं प्राधिकरण की भूमिका में क्षेत्रीय विकास से जुड़े विषयों पर काम करना प्रमुख है।
विंध्य क्षेत्र में अधोसंरचना, धार्मिक पर्यटन, रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा और स्वरोजगार जैसे विषय व्यापक क्षेत्रीय जरूरतों से जुड़े हैं। चित्रकूट जैसे धार्मिक और पर्यटन महत्व वाले क्षेत्रों के विकास के साथ-साथ विंध्य के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की आवश्यकताओं को योजनाओं से जोड़ना इस भूमिका का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।
यहां संगठनात्मक अनुभव की परीक्षा भी अलग स्तर पर होगी। लोगों के बीच वर्षों तक काम करने से समस्याओं की समझ विकसित होती है, लेकिन संस्थागत जिम्मेदारी में उन समस्याओं को योजनाओं, विभागों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के साथ जोड़ना एक अलग चुनौती होती है।
संघर्ष की पगडंडी से जिम्मेदारी के नए पड़ाव तक…. संजय तीर्थवानी के सफर को किसी एक उपलब्धि से परिभाषित करने के बजाय उसके अलग-अलग पड़ावों को देखना अधिक महत्वपूर्ण है। शाखा से शुरू हुई शुरुआत, छात्र राजनीति का अनुभव, भाजयुमो में सक्रियता, मंडल स्तर की जिम्मेदारियां, जिला संगठन में भूमिका, चुनावी गतिविधियां, सामाजिक सेवा और अब विंध्य विकास प्राधिकरण की जिम्मेदारी- यह एक क्रमिक यात्रा है।
इस यात्रा में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पद बदलते गए, लेकिन संगठन और जनसंपर्क से जुड़ा काम लगातार बना रहा। अब उनके सामने जिम्मेदारी का दायरा सतना की स्थानीय राजनीति और संगठनात्मक गतिविधियों से आगे बढ़कर पूरे विंध्य क्षेत्र तक पहुंचा है।
संजय तीर्थवानी के लिए यह सफर किसी अंतिम पड़ाव की तरह नहीं, बल्कि जिम्मेदारी के एक नए चरण की शुरुआत है। जिस संगठनात्मक जमीन पर वर्षों तक काम किया, अब उसी अनुभव को क्षेत्रीय विकास, जनसमस्याओं और विंध्य की आवश्यकताओं के साथ जोड़ना उनके सामने सबसे बड़ी भूमिका है। आने वाला समय यह तय करेगा कि संगठन की जमीन से अर्जित अनुभव को वे विकास की संस्थागत जिम्मेदारी में किस तरह आगे ले जाते हैं।
एक नजर में संजय तीर्थवानी…..
नाम: संजय तीर्थवानी
जन्म: 4 अक्टूबर 1989, सतना
पिता: श्री सुदामा तीर्थवानी
शिक्षा: स्नातक
2007-2011: अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद
2011-2018: भाजयुमो कार्यकर्ता
2018-2021: नगर मंत्री, भाजयुमो
2021-2023: पूर्वी मंडल अध्यक्ष, भाजपा सतना
2023-2025: दीनदयाल मंडल अध्यक्ष, भाजपा सतना
2024-2026: जिला उपाध्यक्ष, भाजपा सतना
2026-वर्तमान: उपाध्यक्ष, विंध्य विकास प्राधिकरण, मध्यप्रदेश शासन











