नागौद की राजनीति का एक अध्याय समाप्त….
रामप्रताप पीछे छोड़ गए संघर्ष और स्मृतियों की विरासत……

नागौद। नागौद विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक रामप्रताप सिंह के निधन की खबर से पूरा क्षेत्र शोक में डूब गया। दिल्ली में उपचार के दौरान उनके निधन की सूचना मिलते ही समर्थकों, शुभचिंतकों और क्षेत्रवासियों में गहरा दुःख व्याप्त हो गया। जिन गलियों और चौपालों में कभी उनकी आवाज सुनाई देती थी, आज वहां उनकी स्मृतियां हैं और नम आंखें हैं।

यह सिर्फ एक पूर्व विधायक के निधन की खबर नहीं, बल्कि उस जनप्रतिनिधि के जाने का दुःख है, जिसे नागौद की जनता ने तीन बार अपना प्रतिनिधि चुना। वर्ष 1985 और 1990 में कांग्रेस के टिकट पर तथा 1998 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उन्होंने चुनाव जीता। तीन बार जनता का विश्वास हासिल करने वाले रामप्रताप सिंह का राजनीतिक जीवन क्षेत्र की राजनीति में अपनी अलग पहचान रखता है।
रामप्रताप सिंह को जुझारू और जनहित के मुद्दों पर सक्रिय नेता के रूप में याद किया जाता है। क्षेत्र के विकास और जनसमस्याओं को लेकर उन्होंने लगातार आवाज उठाई। विशेष रूप से नर्मदा जल सतना लाओ संघर्ष समिति के संयोजक के रूप में उन्होंने सतना जिले को उसके हिस्से का नर्मदा जल दिलाने के लिए संघर्ष किया। बरगी दायीं तट नहर की स्लीमनाबाद टनल के लगभग बंद पड़े कार्य को पुनः शुरू कराने की लड़ाई में भी उनकी भूमिका को याद किया जाएगा।
आज नागौद की चौपालों पर उनकी चर्चा होगी, पुराने साथी उन्हें याद करेंगे और समर्थकों की आंखें नम होंगी। राजनीति में पद और परिस्थितियां बदलती रहती हैं, लेकिन लोगों के बीच बनाई गई स्मृतियां लंबे समय तक बनी रहती हैं।
रामप्रताप सिंह आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी आवाज, उनका संघर्ष और जनहित से जुड़े उनके प्रयास नागौद की स्मृतियों में हमेशा जीवित रहेंगे।
उनके पुत्र गगनेंद्र प्रताप सिंह पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष एवं वरिष्ठ भाजपा नेता हैं। परिवार, समर्थकों और क्षेत्रवासियों के लिए यह अपूरणीय क्षति है।
ईश्वर दिवंगत आत्मा को श्रीचरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिवार को इस अपार दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करें।

विनम्र श्रद्धांजलि…..








