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किशाऊ बांध परियोजना से बदलेगी बिजनौर की सिंचाई व्यवस्था, किसानों को मिलेगा अतिरिक्त पानी

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बिजनौर
 केंद्र सरकार की पहल के बाद छह राज्यों में किशाऊ बांध परियोजना में सहमति बनी है। इस परियोजना के अंतर्गत जिले को भी पानी मिलने की बात कही जा रही है। इससे पहले शारदा-यमुना-साबरमती लिंक नहर के लिए भी जिले में सर्वे हो चुका है।

अभी तक जिले में किसानों की फसलों की सिंचाई पूर्वी मध्य गंगा नहर, पीली बांध जलाशय और रामगंगा बांध कालागढ़ से की जाती है। किशाऊ बांध परियोजना से पानी मिलने से किसानों को और अधिक लाभ होगा।

फसलों की सिंचाई के लिए किसान नलकूपों के अलावा नहरों के पानी का भी प्रयोग करते हैं। गंगा पर बने बैराज से मध्य गंगा नहर फेज वन व टू निकलती हैं, लेकिन इनका पानी जिले के किसानों को नहीं मिलता है।

यहां पूर्वी मध्य गंगा नगर सिंचाई प्रणाली से फसलों को पानी दिया जाता है। पीली बांध जलाशय व रामगंगा बांध कालागढ़ से भी फसलों को पानी दिया जाता है। केंद्र सरकार की योजना यमुना से भी क्षेत्र को जोड़ने की है।

पांच जिलों को फायदा
380 किलोमीटर लंबी बहुप्रतीक्षित शारदा-यमुना-साबरमती लिंक नहर परियोजना के लिए भी जिले में सर्वे किया गया है। उत्तराखंड के टनकपुर से बिजनौर, हरिद्वार, मुजफ्फरनगर, शामली में इस नहर परियोजना का निर्माण कराया जा सकता है।

इस परियोजना में हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर स्थित टोंस नदी पर बांध बनाया जाएगा। बिजली बनाने के साथ ही इसका प्रयोग किसानों को सिंचाई के लिए पानी देने में किया जाएगा। जिले को भी इस बांध परियोजना में पानी मिलने की उम्मीद है। अगर ऐसा होता है तो जिले में भूमि भी अधिग्रहित की जाएगी।

यहां होगा लाभ
जिले में वर्षों से कोई नई नहर परियोजना नहीं आई है। यहां नूरपुर व जलीलपुर क्षेत्र में भूगर्भ जल का स्तर बाकी ब्लाक से नीचे है। हालांकि जलीलपुर क्षेत्र में बरसात में बाढ़ के हालात होते हैं, लेकिन ये बड़े हिस्से में नहीं होता है। इस क्षेत्र के किसानों के लिए किशाऊ बांध परियोजना का पानी बहुत काम आएगा।

 

Aditya
Author: Aditya

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