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1 दिसंबर से घर-घर पहुंचेंगे प्रगणक, परिवार के सभी सदस्यों का नाम दर्ज करना जरूरी

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लखनऊ 

जनगणना-2027 के दूसरे चरण की तैयारियां उत्तर प्रदेश में तेज हो गई हैं। 16 से 30 नवंबर तक लोग घर बैठे स्व-गणना कर सकेंगे। इसके बाद एक दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 तक प्रगणक घर-घर जाकर परिवारों का ब्योरा दर्ज करेंगे। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे परिवार के सभी सदस्यों का नाम जरूर दर्ज कराएं। नाम छूटने पर सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों में हिस्सेदारी प्रभावित हो सकती है।

मंगलवार को लखनऊ के बख्शी का तालाब स्थित दीनदयाल उपाध्याय राज्य ग्राम्य विकास संस्थान में मास्टर ट्रेनरों का प्रशिक्षण शुरू हुआ। निदेशक एवं मुख्य प्रधान जनगणना अधिकारी शीतल वर्मा ने बताया कि जनगणना का उद्देश्य किसी घर या व्यक्ति को छूटने से बचाना और दोहरी गणना रोकना है। स्व-गणना के बाद परिवार को एक आईडी मिलेगी, जिसे प्रगणक के पहुंचने पर दिखाना होगा। ऑनलाइन सुविधा का लाभ न उठा पाने वाले परिवारों का ब्योरा प्रगणक मौके पर दर्ज करेंगे। 5 जनवरी 2027 की मध्यरात्रि को जनगणना का संदर्भ समय माना जाएगा। 5 से 9 जनवरी तक पुनरीक्षण राउंड में जन्म और मृत्यु की जानकारी अपडेट की जा सकेगी।

इसको गंभीरता से करें…

अधिकारियों ने जनगणना प्रक्रिया में लगे अफसरो व कर्मियों से कहा कि किराएदार, प्रवासी मजदूर, निर्माण स्थलों पर रहने वाले श्रमिक, छात्रावासों के छात्र, झुग्गी-बस्ती के परिवार, नवविवाहित महिलाएं और हाल में जन्मे बच्चों के नाम छूटने का खतरा अधिक रहता है। परिवारों को नवजात, बुजुर्ग और दिव्यांग सदस्यों का नाम विशेष रूप से जांचना चाहिए।

सही जानकारी ही दें

प्रदेश में 4,78,783 गणना ब्लॉक हैं। करीब 5,63,000 प्रगणक और पर्यवेक्षक लगाए जाएंगे। 305 मास्टर ट्रेनर 7,500 फील्ड ट्रेनरों को प्रशिक्षण देंगे। अधिकारियों ने नागरिकों से सही जानकारी देने और संदिग्ध व्यक्ति को ब्योरा न देने की अपील की है।

Aditya
Author: Aditya

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