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खनन प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल, स्कूल-जिम और लाइब्रेरी की सुविधाएं बढ़ेंगी, नई नियमावली स्वीकृत

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पटना
 खनन प्रभावित जिलों में अब विकास योजनाओं के साथ स्थानीय लोगों की स्थायी आजीविका और खनन के दुष्प्रभाव कम करने पर जोर रहेगा। राज्य सरकार ने मंगलवार को जिला खनिज फाउंडेशन (संशोधन) नियमावली, 2026 को स्वीकृति दे दी। नई संशोधित नियमावली में जिला खनिज फाउंडेशन के माध्यम से योजनाओं के क्रियान्वयन को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया है।

खान एवं भू-तत्व विभाग के अनुसार राज्य में जो खनन प्रभावित जिले हैं जैसे रोहतास, गया, जमुई, औरंगाबाद, नवादा, बांका, भोजपुर, सारण, वैशाली और भागलपुर, यहां अब स्थानीय जरूरत के अनुसार विकास एवं कल्याणकारी परियोजनाएं संचालित की जा सकेंगी।

इन योजनाओं में खनन प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल, बच्चों के लिए स्कूल, युवाओं के लिए कम लागत वाले जिम, पुस्तकालय जैसी बुनियादी सुविधाओं के विकास के साथ आम लोगों के हित से जुड़ी योजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। यहीं नहीं नई नियमावली में खनन के दौरान और उसके बाद होने वाले प्रतिकूल प्रभावों को कम करने के लिए सरकार के स्तर पर क्या कदम उठाए जाएंगे।

स्थायी आजीविका सुनिश्चित करने के लिए योजना
विभाग का दावा है कि सरकार का फोकस इस बात पर है कि खनन बंद होने के बाद भी प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्विकास और लोगों की जरूरतों पर विशेष ध्यान दिया जाए। खनन से प्रभावित परिवारों की दीर्घकालिक स्थायी आजीविका सुनिश्चित करने के लिए भी योजनाएं बनाई जाएंगी।

इससे खनन पर निर्भर लोगों के लिए वैकल्पिक आय के साधन विकसित करने में मदद मिलेगी। संशोधित नियमावली का उद्देश्य जिला खनिज फाउंडेशन की राशि का उपयोग प्रभावित क्षेत्रों की वास्तविक जरूरतों से जोड़ना है।

Aditya
Author: Aditya

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