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BJP सांसद का दावा- कारगिल, POK और सर क्रीक पाकिस्तान को देने की थी तैयारी

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नई दिल्ली

भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे ने बुधवार को जुलाई 2006 में मुंबई ट्रेन बम धमाकों के बाद सीमा पार आतंकवाद से निपटने के तरीके को लेकर कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधा। एक्स पर एक पोस्ट में दुबे ने पिछली यूपीए सरकार के डिप्लोमैटिक रुख की तुलना मौजूदा सरकार के रुख से किया। उन्होंने कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन पर आरोप लगाया कि उसने निर्णायक सैन्य कार्रवाई करने के बजाय अमेरिकी डिप्लोमैटिक दबाव के आगे घुटने टेक दिए। दुबे ने दावा किया कि कांग्रेस ने हवाना बैठक में कारगिल, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर और सर क्रीक को पाकिस्तान को सौंपने का फैसला कर लिया था।

कांग्रेस अमेरिकी दबाव में काम कर रही थी
दुबे ने 16 सितंबर 2006 को हवाना में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक का जिक्र करते हुए इसे विदेशी दबाव में की गई कोशिश बताया। उन्होंने कहा कि इसी दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के बीच अमेरिकी दबाव में बैठक हुई थी। जुलाई 2006 में मुंबई की लोकल ट्रेनों में सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे, जिनमें कम से कम 200 लोगों की जान चली गई थी। हजारों लोग विकलांग और घायल हो गए थे। पूरे भारत में पाकिस्तान के खिलाफ हमले का माहौल बन गया था। लेकिन, सोनिया गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस कमजोर, बेबस और अमेरिकी दबाव में काम कर रही थी। पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देने के बजाय सोनिया गांधी जी के नेतृत्व में कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने अपनी अगस्त की बैठक में यह फैसला किया कि बातचीत के जरिए समझौता किया जाएगा।

विकिलीक्स के खुलासों का हवाला
विकिलीक्स के खुलासों का हवाला देते हुए दुबे ने आरोप लगाया कि यूपीए नेतृत्व व्यापक कूटनीतिक समझौतों के तहत कारगिल, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर और सर क्रीक के मामले में रियायतें देने के लिए तैयार था। 22 सितंबर 2006 को वाशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश और दक्षिण एशियाई नेताओं के बीच हुई बैठकों के ऐतिहासिक रिकॉर्ड का जिक्र करते हुए दुबे ने दावा किया कि द्विपक्षीय बातचीत की जानकारी भारत-अमेरिका परमाणु समझौते के तहत सौंपी गई थी।

पूरी जानकारी राष्ट्रपति बुश को सौंप दी
भाजपा सांसद ने कहा कि यह सुनकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे कि हमने 2006 की हवाना बैठक में ही कारगिल, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर और सर क्रीक को पाकिस्तान को सौंपने का फैसला कर लिया था। इस बैठक के ठीक बाद 22 सितंबर 2006 को पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज और भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अमेरिका पहुंचे और बातचीत की पूरी जानकारी राष्ट्रपति बुश को सौंप दी। हमने परमाणु समझौते में ही अपनी संप्रभुता अमेरिका को सौंपने का फैसला कर लिया था और बदले में अपना कारगिल और कश्मीर भी।

राहुल गांधी से जवाब मांगा
दोनों दौर की तुलना करते हुए दुबे ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से 2006 में पाकिस्तान के साथ हुई कूटनीतिक बातचीत और 2025 के पहलगाम आतंकी हमले पर मौजूदा सरकार की प्रतिक्रिया के बीच के अंतर पर जवाब मांगा। पहलगाम हमले के बाद सेना ने सीमा पार आतंकी ठिकानों को निशाना बनाते हुए 'ऑपरेशन सिंदूर' चलाया था। दुबे ने कहा कि राहुल गांधी को जनता को 2025 की पहलगाम घटना और उसके बाद हुए 'ऑपरेशन सिंदूर' की तुलना 2006 के मुंबई धमाकों और उसके बाद पाकिस्तान के साथ हुई गले मिलने की घटनाओं को समझाना चाहिए।

Aditya
Author: Aditya

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