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मैहर में हाथी ‘E-5’ का आतंक: आदिवासी के घर की दीवार तोड़ी, 10 दिन से इलाके में डटा; रात में पहाड़ से उतरकर धान की फसल रौंदी..

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मैहर में हाथी ‘E-5’ ने आदिवासी के घर की दीवार तोड़ी, धान की फसल रौंदी; 10 दिन से इलाके में डटा, किसान की मौत के बाद दहशत..

मैहर/रामनगर। बांधवगढ़ नेशनल पार्क से निकला जंगली हाथी ‘E-5’ पिछले करीब 10 दिनों से मैहर वनमंडल की अमरपाटन रेंज में लगातार घूम रहा है। बाणसागर डैम तैरकर इस इलाके में पहुंचे हाथी ने मंगलवार-बुधवार की दरमियानी रात गोरसरी पहाड़ से नीचे उतरकर रामनगर के आबादी वाले क्षेत्र में दस्तक दी। हाथी ने गोरसरी गांव के बरहा टोला में एक आदिवासी परिवार के मकान की दीवार गिरा दी और इसके बाद खेत में पहुंचकर धान की फसल को नुकसान पहुंचाया।

घर में सो रहा था परिवार, अचानक गिरा दी दीवार

ग्रामीणों के मुताबिक, हाथी रात के समय गोरसरी गांव के बरहा टोला पहुंचा। इसी दौरान उसने आदिवासी पिंटू कोल के मकान की दीवार गिरा दी। घटना के समय पिंटू कोल घर के अंदर सो रहे थे। गनीमत रही कि दीवार गिरने के बावजूद उनकी जान बच गई और कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ।

मकान को नुकसान पहुंचाने के बाद हाथी आगे बढ़ गया और देवेंद्र सिंह के खेत में पहुंचा। यहां हाथी ने धान की फसल खाई और काफी हिस्सा पैरों से कुचल दिया। इससे किसान को फसल के नुकसान का सामना करना पड़ा है।

दिन में पहाड़, रात में आबादी की ओर उतरता है हाथी

ग्रामीणों का कहना है कि ‘E-5’ दिनभर गोरसरी पहाड़ के घने जंगलों में छिपा रहता है। शाम होते ही वह भोजन की तलाश में पहाड़ी से नीचे उतरकर खेतों और आबादी वाले इलाकों की तरफ आने लगता है। लगातार स्थान बदलने के कारण वन विभाग की टीम भी उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए है।

हाथी को नियंत्रित करने और उसे आबादी से दूर रखने के लिए बांधवगढ़ से प्रशिक्षित कुमकी हाथी सूर्या और रामा को भी मौके पर तैनात किया गया है। वन विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार जंगली हाथी कई बार रात में कुमकी हाथियों के आसपास पहुंचता है और कुछ देर बाद फिर पहाड़ी क्षेत्र की ओर लौट जाता है।

30 कर्मचारियों की टीम निगरानी में जुटी

हाथी के आबादी वाले क्षेत्र में पहुंचने की सूचना मिलते ही वन विभाग और पुलिस की टीम सक्रिय हो गई। प्रभावित गांवों में सुरक्षा के मद्देनजर कई बार बिजली आपूर्ति बंद करनी पड़ती है, ताकि हाथी और ग्रामीणों के बीच किसी तरह की अप्रिय स्थिति न बने। हालांकि बिजली बंद होने से ग्रामीणों को अंधेरे में रहना पड़ रहा है और उनमें डर का माहौल है।

अमरपाटन रेंजर प्रफुल्ल त्रिपाठी के अनुसार, डीएफओ और रेंजर सहित करीब 30 वनकर्मी पिछले 10 दिनों से हाथी की निगरानी में मैदान में तैनात हैं। हाथी के गले में लगे रेडियो कॉलर के माध्यम से उसकी लोकेशन लगातार ट्रैक की जा रही है।

वन विभाग की ग्रामीणों से अपील

वन विभाग ने प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील की है। अधिकारियों ने कहा है कि हाथी दिखाई देने पर उसके करीब न जाएं, उसका पीछा न करें और उसे भगाने की कोशिश न करें। साथ ही हाथी का वीडियो बनाने के लिए उसके पास जाने से भी बचने की सलाह दी गई है।

पहले किसान की हो चुकी है मौत

जंगली हाथी ‘E-5’ के कारण क्षेत्र में चिंता पहले ही बढ़ चुकी है। ग्रामीणों के अनुसार, 7-8 सितंबर की रात रामनगर क्षेत्र में हाथी की गतिविधि के दौरान 50 वर्षीय किसान कन्छेदी यादव की मौत हो चुकी है। इसके बाद से वन विभाग हाथी की गतिविधियों को लेकर विशेष सतर्कता बरत रहा है।

लगातार फसलों और मकानों को हो रहे नुकसान से ग्रामीणों में नाराजगी भी बढ़ रही है। ग्रामीणों की मांग है कि हाथी को आबादी और खेती वाले क्षेत्रों से दूर रखने के लिए प्रभावी व्यवस्था की जाए, ताकि जान-माल और फसलों को होने वाले नुकसान को रोका जा सके।

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Kishan Gupta
Author: Kishan Gupta

journalist

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