Edition

गैस सिलेंडर के दाम ₹400 तक आने की चर्चा, क्या बढ़ेगी LPG सब्सिडी? जानें पूरा मामला

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

नई दिल्ली

ऊर्जा, पर्यावरण और जल परिषद यानी CEW की एक रिपोर्ट आई है। इसमें कहा गया है कि LPG की कीमत एक ऐसा बड़ा मुद्दा है, जो सभी वर्गों के लिए चुनौती बना हुआ है। मौजूदा दरें आम आदमी की पहुंच से काफी ऊपर हैं। इसी वजह से लोग जलाऊ लकड़ी या महंगे अनौपचारिक सिलेंडरों का सहारा ले रहे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक अगर 14.2 किलोग्राम वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत 400 रुपये हो जाए तो 80 प्रतिशत से अधिक लोग पूरी तरह से गैस पर आ जाएंगे। अभी सिलेंडर रिफिल करवाने की औसत भुगतान क्षमता 500 रुपये प्रति सिलेंडर है, जबकि उज्ज्वला योजना के तहत सब्सिडी वाला सिलेंडर 642 रुपये का है।

प्रवासी मजदूरों को भारी दिक्कतें
स्टडी के अनुसार, प्रवासी मजदूरों
में से 79 प्रतिशत के पास औपचारिक गैस कनेक्शन नहीं है और 4 प्रतिशत से भी कम लोग प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का लाभ पा रहे हैं। यह स्थिति इसलिए और हैरान करने वाली है, क्योंकि 2021 की नीति में प्रवासी मजदूरों के लिए सेल्फ-डिक्लेरेशन के माध्यम से कनेक्शन लेने की सुविधा पहले ही दे दी गई थी। इसके बावजूद जागरूकता की कमी और कागजी प्रक्रियाओं में उलझन के कारण प्रवासी मजदूर इस योजना से दूर हैं।

सीईडब्ल्यू की फेलो प्रार्थना बराह का कहना है कि सरकार का यह सोचना कि केवल एलपीजी कनेक्शन दे देने भर से काम हो जाएगा, सही नहीं है। असली चुनौती यह है कि लोग नियमित रूप से गैस रिफिल करवा पाएं, प्रवासी मजदूरों को उज्ज्वला योजना की पूरी जानकारी हो और ग्रामीण घरों तक सिलेंडर भरोसेमंद ढंग से पहुंचते रहें।

उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि भारत की स्वच्छ हवा की नीति को केवल 'कनेक्शन देने' से आगे बढ़कर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि साफ ईंधन सस्ता, भरोसेमंद और लंबे समय तक टिकाऊ हो।

शहरी झुग्गियों और प्रवासियों की स्थिति
शहरी अनौपचारिक बस्तियों में 70 प्रतिशत लोग पूरी तरह से गैस का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन बिना औपचारिक कनेक्शन वाले 31 प्रतिशत लोगों को एड्रेस प्रूफ न होने के कारण कनेक्शन देने से मना कर दिया जाता है। इस वजह से 11 प्रतिशत लोग वास्तविक रिटेल प्राइस के बजाय 1,040 रुपये तक अनौपचारिक रूप से सिलेंडर खरीदने को मजबूर हैं।

वहीं, प्रवासी मजदूरों में से 70 प्रतिशत, जो खुले स्थानों में रहते हैं, पूरी तरह से ठोस ईंधनों जैसे लकड़ी और कोयले पर निर्भर हैं। जो प्रवासी अनौपचारिक रूप से गैस खरीदते हैं, उन्हें 71 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से भुगतान करना पड़ता है, जो आधिकारिक दर से 20 प्रतिशत से अधिक महंगा है।

200 रुपये और बढ़े सब्सिडी
सीईडब्ल्यू की पहली सिफारिश यह है कि पेट्रोलियम मंत्रालय को उज्ज्वला सब्सिडी को प्रति सिलेंडर लगभग 200 रुपये बढ़ाना चाहिए। दूसरा सुझाव प्रवासी मजदूरों के लिए विशेष पंजीकरण अभियान चलाने का है, ताकि वे आसानी से उज्ज्वला योजना से जुड़ सकें।

तीसरा, स्मार्ट मीटर कियोस्क की पायलट परियोजनाएं शुरू करने की सिफारिश की गई है, ताकि लोग छोटी-छोटी किस्तों में गैस के पैसे जमा कर सकें। ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर डिलीवरी बढ़ाने के लिए विक्रेताओं को अलग-अलग कमीशन देने का सुझाव दिया गया है, ताकि दूर-दराज के इलाकों में भी सिलेंडर पहुंच सकें।

Aditya
Author: Aditya

Share करें

✓ Link copy हो गया!

Leave a Comment

और पढ़ें

error: Content is protected !!