Edition

सतना में फर्जी सिम का खेल उजागर, साइबर गैंग को बेचते थे सिम

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

सतना में फर्जी सिम का नेटवर्क पकड़ा गया, 2 आरोपी गिरफ्तार

ग्राहकों के दस्तावेजों से अतिरिक्त सिम निकालकर साइबर गैंग को बेचते थे, 200 रुपए में होती थी एक सिम की डील…..

 

सतना। कोलगवां पुलिस ने ग्राहकों के वैध दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल कर अतिरिक्त सिम कार्ड जारी कराने और उन्हें साइबर अपराधियों तक पहुंचाने वाले कथित नेटवर्क का खुलासा किया है। पुलिस ने मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में 20 से ज्यादा सिम कार्ड दूसरे लोगों को बेचने की बात सामने आई है।

पुलिस के मुताबिक, यह मामला तब सामने आया जब सतना के एक युवक के नाम पर जारी सिम कार्ड का इस्तेमाल बेंगलुरु में लाखों रुपए के साइबर फ्रॉड में किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्टेट साइबर सेल ने सतना पुलिस को जांच के निर्देश दिए। इसके बाद पुलिस ने पिछले कुछ महीनों में जारी 38 से अधिक सिम कार्डों की जांच शुरू की।

सिम पोर्ट कराने दिए थे दस्तावेज, एजेंट ने रख लिए

जांच के दौरान पुलिस ने सनत कुमार सिंह, महेंद्र साकेत और नीलू मिश्रा से पूछताछ की। उनके मुताबिक करीब 4-5 महीने पहले उन्होंने मोबाइल नंबर पोर्ट कराने के लिए माधवगढ़ स्थित मोबाइल दुकान के POS एजेंट रजनीकांत साकेत को आधार कार्ड समेत जरूरी दस्तावेज दिए थे।

आरोप है कि रजनीकांत ने सिम पोर्ट कराने के बजाय ग्राहकों के दस्तावेज अपने पास रख लिए और उन्हीं दस्तावेजों का इस्तेमाल कर अतिरिक्त सिम कार्ड निकलवाए।

200 रुपए में आगे बेचता था सिम

पुलिस ने जांच के आधार पर रजनीकांत साकेत (29), निवासी इटौरा, थाना रामपुर बाघेलान को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में ग्राहकों के दस्तावेजों पर अतिरिक्त सिम जारी कराने की जानकारी सामने आई।

आरोप है कि रजनीकांत इन अतिरिक्त सिम कार्डों को करीब 200-200 रुपए में अखिलेश सतनामी (21), निवासी सकरिया, थाना कोलगवां को बेचता था। इसके बाद अखिलेश इन सिम कार्डों को आगे साइबर अपराधियों तक पहुंचाता था।

Telegram और WhatsApp ग्रुप के जरिए साइबर अपराधियों से संपर्क

रजनीकांत से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने अखिलेश सतनामी को भी गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक पूछताछ में अखिलेश ने बताया कि वह Telegram और WhatsApp ग्रुप के माध्यम से दूसरे राज्यों में सक्रिय लोगों के संपर्क में था।

पुलिस का कहना है कि मोटे कमीशन के लालच में अखिलेश सिम कार्ड खरीदकर आगे सप्लाई करता था। अब तक की जांच में दोनों आरोपियों द्वारा 20 से अधिक सिम कार्ड बेचने की जानकारी सामने आई है।

साइबर फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट में इस्तेमाल की आशंका

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों के जरिए उपलब्ध कराए गए कुछ सिम कार्डों का इस्तेमाल साइबर फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट जैसे अपराधों में किया गया। बेंगलुरु में हुए लाखों रुपए के साइबर फ्रॉड में सतना के युवक के नाम से जारी सिम के इस्तेमाल के बाद पुलिस ने इस पूरे नेटवर्क की जांच तेज कर दी।

अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों ने अब तक कितने अतिरिक्त सिम कार्ड जारी करवाए और इनका इस्तेमाल किन-किन साइबर अपराधों में हुआ। साथ ही दूसरे राज्यों में सक्रिय साइबर अपराधियों और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी जानकारी जुटाई जा रही है।

BNS, IT एक्ट और दूरसंचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज

पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ BNS की धारा 318(4), 3(5), IT एक्ट की धारा 66(C) और दूरसंचार अधिनियम की धारा 42(3)(ई) एवं 42(6) के तहत मामला दर्ज किया है।

दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। पुलिस अब पूरे नेटवर्क की आगे की कड़ियां खंगाल रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि फर्जी तरीके से जारी किए गए सिम कार्ड किन-किन साइबर अपराधों में इस्तेमाल हुए हैं।

#SatnaNews #SatnaPolice #CyberCrime #CyberFraud #FakeSIM #DigitalArrest #CrimeNews #MPNews #Kolgaon #RewanchalRoshni

Kishan Gupta
Author: Kishan Gupta

journalist

Share करें

✓ Link copy हो गया!

Leave a Comment

और पढ़ें

error: Content is protected !!