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वडोदरा में PM मोदी का कांग्रेस पर निशाना, ‘हमने बनाए 50 हजार रेल कोच, कांग्रेस 50 हजार टॉयलेट भी नहीं बना पाई’

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वड़ोदरा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को वडोदरा में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के तीन सेक्शनों का उद्घाटन किया. इससे नोएडा के दादरी से नवी मुंबई तक ये कॉरिडोर पूरी तरह चालू हो गया. पीएम मोदी ने कहा कि 2004 में योजना बनने के 10 साल तक पिछले सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी रही. वर्ष 2014 से 12 साल के भीतर हमने 2800 किमी के इस कॉरिडोर को पूरा कर दिया. इसमें मालगाड़ियों की रफ्तार दोगुना हो गई है. ट्रेवल से ट्रांसपोर्ट तक अलग-अलग रूट से कनेक्टिविटी की स्पीड बढ़ी है और लॉजिस्टिक्स की लागत घटी है। 

2004 से 10 साल कॉरिडोर पर कोई काम नहीं
यह 21वीं सदी के भारत के लिए ऐतिहासिक कार्य संपन्न हुआ है. ये कॉरिडोर इस बात का साक्षी है कि बीते 12 साल में देश की काम करने की संस्कृति कैसे बदली है. इस कॉरिडोर पर 2004 में विचार शुरू हुआ था, 2006 में एक स्पेशल कंपनी बनाई गई. फिर 2014 तक फाइलें ही यहां से वहां होती रहीं. फाइलें टेबल पर यात्रा कर रही थीं. इन फाइलों को भी डेडिकेटेड कॉरिडोर नसीब नहीं हुआ. वर्ष 2014 में वड़ोदरा, गुजरात औऱ देश के लोगों ने मुझे दिल्ली भेजा. आपने मुझे भेजा और उनकी विदाई हुआ. 7-8 वर्षों में एक किलोमीटर का काम भी इन लोगों ने नहीं किया. उनके हिसाब से देश चलाते तो आपके बाद तीन-चार पीढ़ियांआती तो भी काम पूरा नहीं होता। 

ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर में बड़ा बदलाव
भारत के लॉजिस्टिक्स सिस्टम कमें बदलाव हम करके लाए हैं. आपकी शिक्षा-दीक्षा और गुजरात से जो पाठ सीखकर मैं वहां पहुंचा था, उसी के आधार पर हमने कॉरिडोर को आगे बढ़ाया और 12साल में पूरा करके दिखाया. आज ईस्टर्न और वेस्टर्न फ्रेट कॉरिडोर देश के मुख्य कारोबार का मुख्य आधार बन गया है. ये कॉरिडोर तेजी से विकसित होते भारत की जीवन रेखा है. इसने भारत के ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर का कायाकल्प कर दिया है. पहले पैसेंजर ट्रेन जिस ट्रैक पर चलती थी, उसी ट्रैक पर मालगाड़ी भी चलती थी. ट्रेवल और ट्रांसपोर्ट दोनों धीमा था. लेकिन डेडिकेटेड कॉरिडोर ने स्थिति बदल दी। 

रोजाना 430 किमी गुड्स ट्रेनें चलती हैं कॉरिडोर पर
पीएम मोदी ने कहा, पूर्वी और पश्चिमी कॉरिडोर पर रोज 430 से मालगाड़ियां चलती हैं. पहले जो मालगाड़ी साढ़े छह घंटे में 100 किमी चलती थी, वहीं मालगाड़ी आधे से भी कम समय में 100 किमी का सफर तय कर लेगी. जिस जगह ट्रक से सामान भेजने में सामान्य तौर पर 30 घंटे लगते हैं, कॉरिडोर से यही दूरी 10-12 घंटे में पूरी हो जाती है. मालगाड़ी के चलने से ट्रक और ट्रेन का फ्यूल बचता है, किराया भाड़ा का खर्च कम हुआ है. समय बचा है, पर्यावरण को फायदा हुआ है। 

Aditya
Author: Aditya

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