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नई नौकरी ज्वाइन करने से पहले ऑफर लेटर में जरूर चेक करें ये 5 बातें

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नई नौकरी की खुशी हर कर्मचारी को होती है, फिर वह चाहे युवा हो या एक्सपीरियंस. कई बार नई पोजिशन और अच्छी सैलरी की खुशी में वह अपना ऑफर लेटर सही तरह से नहीं चेक करते और इसकी वजह से उन्हें बाद में बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ता है. दरअसल, ऑफर लेटर सिर्फ यह बताने वाला दस्तावेज नहीं है कि कंपनी आपको नौकरी दे रही है, बल्कि यह एक महत्वपूर्ण लीगल डॉक्यूमेंट भी होता है.

इसमें आपकी सैलरी, जॉइनिंग डेट, प्रोबेशन पीरियड, नोटिस पीरियड, नौकरी की शर्तें, जिम्मेदारियां और कंपनी की कई नीतियों से जुड़ी जानकारी हो सकती है. कई बार ऑफर लेटर में ऐसी शर्तें भी होती हैं, जिन पर उम्मीदवार का ध्यान नहीं जाता, लेकिन नौकरी ज्वाइन करने के बाद उनका असर सामने आता है. इसलिए नया ऑफर मिलते ही उत्साह में एक्सेप्ट बटन दबाने या दस्तावेज पर साइन करने से पहले इन जानकारियों के बारे अच्छे से पढ़े और अगर कहीं पर डाउट हो तो, उसे नजरअंदाज करने के बजाय HR से पूछ लें.

CTC और इन हैंड सैलरी सेम है
कई बार ऑफर लेटर आते ही कर्मचारी केवल CTC को ही देखते हैं और इन हैंड सैलरी पर उनका ध्यान नहीं जाता है. लेकिन ऑफर लेटर आने के बाद उम्मीदवारों को CTC के साथ इन हैंड सैलरी पर भी ध्यान देना चाहिए. ये दोनों सेम है या नहीं इसपर जरूर फोकस करना चाहिए.

नोटिस पीरियड का दे ध्यान
इसके साथ ही कई बार कर्मचारी का ध्यान नोटिस पीरियड पर भी नहीं जाता है. उन्हें लगता है कि कौन सा अभी कंपनी छोड़कर जा रहे हैं और वह इसपर ध्यान नहीं देते हैं लेकिन जब वह यह नौकरी छोड़ने वाले होते हैं, तो उन्हें अपनी गलती का एहसास होता है. तो नई कंपनी ज्वाइन करने से पहले उन्हें मालूम होना चाहिए कि कंपनी 30, 60 या 90 दिनों का नोटिस मांगती है.

ऑफर में क्लॉज  
इसके साथ ही कर्मचारी को अपने ऑफर लेटर में किसी भी तरह का एंप्लॉयमेंट क्लॉज या पेनल्टी क्लॉज दिखाई देता है, तो उसे इसपर ध्यान देना चाहिए.   

एंप्लॉयमेंट क्लॉज- ऑफर लेटर में नौकरी से जुड़ी वे शर्तें, जिनका पालन कर्मचारी को करना होता है. इसमें नौकरी की अवधि, नोटिस पीरियड, काम की जिम्मेदारियां, कंपनी की नीतियां या दूसरी रोजगार संबंधी शर्तें शामिल हो सकती हैं.

पेनल्टी क्लॉज- ऐसी शर्त जिसमें किसी नियम या तय शर्त का उल्लंघन करने पर कर्मचारी से जुर्माना या किसी तरह की आर्थिक भरपाई की बात कही गई हो. उदाहरण के लिए, कंपनी की किसी शर्त के मुताबिक तय अवधि से पहले नौकरी छोड़ने पर भुगतान करने की शर्त.

लोकेशन और प्रोबेशन पीरियड का भी रखें ध्यान
इसके अलावा आप किस रोल के लिए हायर हुए हैं, कंपनी की लोकेशन क्या है, प्रोबेशन पीरियड कितने दिनों का होता है और कंपनी में ट्रांसफर पॉलिसी को लेकर क्या नियम होते है, इसके बारे में भी नॉलेज होना जरूरी है. ये सारी डिटेल ऑफर लेटर में दी जाती है.

Aditya
Author: Aditya

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