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सूचनाओं के महासागर में विवेक और जीवन-मूल्यों की राह दिखाता शिक्षक

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सीपत

सब धरती कागद करूँ, लेखनी सब बनराय।
सात समुद्र की मसि करूँ, गुरु गुण लिखा न जाय॥”

संत कबीरदास की ये पंक्तियाँ गुरु की महिमा को शब्दों में बाँधने की असमर्थता व्यक्त करती हैं। सच ही है, शिक्षक के योगदान को किसी एक दिवस या कुछ शब्दों में समेट पाना संभव नहीं। शिक्षक केवल ज्ञान देने वाला नहीं, बल्कि विद्यार्थी के व्यक्तित्व, संस्कार और चरित्र को आकार देने वाला सच्चा शिल्पकार है।

बचपन में विद्यालय में गाई जाने वाली पंक्तियाँ—“शिक्षक नई सुबह का सूरज, नई रोशनी का निर्माता, वह पारस मणि है, जिसको छूकर लोहा कंचन बन जाता है”—तब केवल गीत की पंक्तियाँ हुआ करती थीं। समय और जीवन के अनुभवों ने बाद में इन शब्दों के गहरे अर्थ समझाए और यह अनुभूति कराई कि शिक्षक वास्तव में वह प्रकाश है, जो अनेक जीवनों को दिशा देता है।

आज ज्ञान हर दिशा से बरस रहा है। तकनीक के माध्यम से मोबाइल और इंटरनेट पर सूचनाओं का विशाल संसार हर समय उपलब्ध है। ऐसे समय में शिक्षक की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि तकनीक जानकारी दे सकती है, लेकिन क्या ग्रहण करना है और क्या छोड़ देना है—इसका विवेक एक सच्चा शिक्षक ही विकसित करता है।

शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा नहीं करता, वह जीवन को समझने की दृष्टि देता है। विद्यार्थियों की क्षमताओं और आवश्यकताओं को समझते हुए वह ज्ञान के साथ व्यवहारिकता, मानवीय संवेदना, संस्कार और जीवन जीने की कला सिखाता है।

प्रकृति भी हमारी महान शिक्षिका है। माँ वसुंधरा से धैर्य, गगन से विशालता, अग्नि से तेज, जल से निर्मलता और वायु से स्वतंत्रता की सीख मिलती है। उसी प्रकार शिक्षक भी अपने आचरण और मार्गदर्शन से विद्यार्थियों के भीतर जीवन के अनेक मूल्यों का संचार करता है।

शिक्षक की सबसे बड़ी सफलता यह नहीं कि विद्यार्थी कितना जानता है, बल्कि यह है कि वह अपने ज्ञान के साथ कितना अच्छा मनुष्य बनता है।
शिक्षक दिवस पर भारत के पूर्व राष्ट्रपति एवं महान शिक्षाविद् डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को नमन करते हुए उन सभी गुरुजनों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना आवश्यक है, जिन्होंने अपने ज्ञान, संस्कार और स्नेह से अनगिनत जीवनों को दिशा दी।
क्योंकि शिक्षक वह दीप है, जो स्वयं जलकर भी दूसरों के जीवन में प्रकाश भरता रहता है।

लेखिका : बीना निगम
शिक्षिका, बाल भारती पब्लिक स्कूल, सीपत

Aditya
Author: Aditya

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