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रक्षाबंधन के अवसर पर प्रदेश की जेलों में भावनात्मक माहौल, बहनों ने जेल पहुंचकर भाइयों की कलाई पर बांधी राखी

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भोपाल 

मध्यप्रदेश जेल प्रशासन के आदेशानुसार जेल महानिदेशक डॉ. वरुण कपूर के मार्गदर्शन में रक्षाबंधन के पावन अवसर पर प्रदेश की विभिन्न जेलों में निरुद्ध लगभग 45000 बंदियों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए, जेलों में अधिकारी एवं कर्मचारियों की उपस्थिति‍ में कड़ी सुरक्षा एवं निगरानी के बीच खुली मुलाकात (जेल के अंदर रिक्‍त स्‍थान या खुले मैदान में बंदी के परिजनों को जेल गेट के अंदर लेकर करवाई जाने वाली मुलाकात) का विशेष आयोजन किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में बहनें अपने भाइयों से मिलने जेल पहुंचीं और उन्होंने भाइयों की कलाई पर पवित्र राखी बांधकर उनके स्वस्थ, सुखी एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना की। वहीं दूसरी तरफ जेलों में निरुद्ध महिला बंदी बहनों से मिलने उनके भाई एवं परिजन पहुंचे। लंबे समय बाद अपने बच्‍चों (10 वर्ष तक के) एवं परिजनों से मिलकर बंदी भाई-बहनों के चेहरे प्रसन्‍नता से खिल उठे साथ ही लम्‍बे समय से उनसे जुदाई के कारण आंखों में आनंद के अश्रु दिखाई दिए। इस दौरान जेलों में भाई-बहन के आत्‍मिक प्रेम और स्नेह के भावुक कर देने वाले दृश्‍य देखने को मिले।

प्रदेश की जेलों में आयोजित खुली मुलाकात के लिए जेल प्रशासन द्वारा बंदियों एवं उनके परिजनों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए, आवश्यक व्यवस्थाएं की गईं थीं। खुली मुलाकात के दौरान सुरक्षा मानकों का पूर्ण पालन करते हुए, जेल अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा सतत निगरानी रखी गई तथा संपूर्ण सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ मुलाकात के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।

इस विशेष आयोजन के शुभ अवसर पर *महानिदेशक जेल, डॉ. वरुण कपूर* स्‍वयं केन्‍द्रीय जेल इंदौर में उपस्थित रहे, जहां उनके द्वारा सभी बंदियों एवं उनके परिजनों को शुभकामनाएं एवं बधाइयां प्रेषित कीं गईं। उन्‍होंने मीडिया से चर्चा के दौरान बताया कि इस प्रकार के विशेष आयोजनों से बंदियों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उनके अंदर पारिवारिक एवं सामाजिक कर्तव्‍य की भावनाएं जागृत करने एवं उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश जेल विभाग द्वारा प्रतिवर्ष कुछ विशेष त्‍यौहारों पर खुली मुलाकात का आयोजन किया जाता है। डॉ. कपूर ने यह भी बताया कि प्रदेश की विभिन्न जेलों में निरुद्ध *लगभग 27,000 बंदी भाईयों एवं बहनों से, उनके लगभग 85000 परिजनों ने खुली मुलाकात की* । जो शांतिपूर्ण, सौहार्दपूर्ण एवं पारिवारिक वातावरण में संपन्‍न हुई, जो जेल की चाक-चौबंद व्‍यवस्‍था को दशार्ता है।

Aditya
Author: Aditya

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