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भोपाल सेंट्रल जेल में रक्षाबंधन का खास इंतजाम, बहनों को भाइयों से मिलने की मिली अनुमति

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 भोपाल
 भोपाल सेंट्रल जेल ने शुक्रवार को रक्षाबंधन के लिए खास इंतजाम किए, जिसके तहत बहनें जेल परिसर के अंदर अपने भाइयों से मिल सकीं और उन्हें राखी बांध सकीं। कई महिलाओं ने लंबे समय बाद अपने भाइयों से मिलकर खुशी जाहिर की और उनसे यह वादा भी लिया कि वे भविष्य में अपनी गलतियों को नहीं दोहराएंगे।

जेल सुपरिटेंडेंट मनेंद्र सिंह परिहार ने बताया कि जेल आने वाली बहनों के लिए खास इंतजाम किए गए थे, जिसमें जेल कैंटीन के जरिए राखी, मिठाई और कुमकुम की उपलब्धता भी शामिल थी।

जेल कैंटीन से मिठाई, राखी और कुमकुम का इंतजाम
परिहार ने कहा, रक्षाबंधन के मौके पर जो बहनें जेल में बंद अपने भाइयों को राखी बांधना चाहती थीं, उनके लिए जेल कैंटीन के जरिए मिठाई, राखी, कुमकुम और दूसरी चीजों का इंतजाम किया गया। महिला गार्ड्स द्वारा ठीक से तलाशी लेने के बाद ही उन्हें अंदर जाने की इजाजत दी गई। 20-25 मिनट की मुलाकात के बाद उनके सुरक्षित बाहर निकलने का भी इंतजाम किया गया।

भाई को सलाखों के पीछे देख छलक पड़े आंसू
राखी बांधते समय कई बहनों के चेहरे पर भाई से मिलने की खुशी थी, लेकिन सलाखों के पीछे भाई को देखकर दर्द भी साफ नजर आया। कुछ बहनें भाई से मिलकर रो पड़ीं तो कुछ ने खुद को संभालते हुए उन्हें हिम्मत दी। बहनों ने भाइयों से कहा कि वे परेशान न हों और जेल से बाहर आने के बाद अच्छा जीवन जीने का संकल्प लें।

बंदी भाइयों को राखी बांधने पहुंचीं ममता और सलोनी ने कहा कि रक्षाबंधन पर भाई से मिलकर बहुत खुशी हुई। भगवान से उन्होंने यही प्रार्थना की है कि उनके भाई जल्द जेल से बाहर आएं और परिवार के साथ रहें।

3600 पुरुष और 180 महिला बंदी
जेल अधीक्षक मानवेन्द्र सिंह परिहार ने बताया कि रक्षाबंधन पर खुली मिलाई कराई गई। जेल प्रशासन की ओर से मुलाकात के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी। भोपाल सेंट्रल जेल में करीब 3600 पुरुष बंदी और 180 महिला बंदी हैं। महिला बंदियों के लिए अलग समय पर मुलाकात की व्यवस्था की गई।

उन्होंने बताया कि प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े कैदियों को भी विशेष सुरक्षा व्यवस्था के बीच परिजनों से मिलने की अनुमति दी गई। जेल प्रशासन की टीम पूरे आयोजन के दौरान व्यवस्था संभालती रही।

अभी जेल में लगभग 3,648 कैदी बंद हैं
आम कैदियों के लिए कोई अलग वर्गीकरण नहीं था और उनके परिवार के सदस्यों को मिलने का एक ही समय दिया गया था। हालांकि, प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े कैदियों के लिए शाम को मिलने का अलग समय तय किया गया था। अभी जेल में लगभग 3,648 कैदी बंद हैं, जिनमें से लगभग 1,100-1,200 कैदियों की मुलाकातें हो चुकी हैं और करीब 3,500 परिवार के सदस्य उनसे मिलने आए हैं।

जेल में लगभग 180 महिला कैदी भी बंद हैं
जेल सुपरिटेंडेंट ने बताया कि जेल में लगभग 180 महिला कैदी भी बंद हैं और उनके भाइयों से मिलने के लिए भी अलग इंतजाम किए गए थे। वहां लगभग 180 महिला कैदी हैं। जो पुरुष अपनी कैदी बहनों से मिलने आएंगे, उन्हें शाम 3 बजे से 4 बजे के बीच मिलने की इजाजत दी गई थी। भीड़ कम होने के बाद उन्हें अलग से मिलने दिया जाएगा।

 

Aditya
Author: Aditya

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