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iPhone की EMI नहीं चुका पाए डांस टीचर, तनाव में यमुना में कूदे

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 नई दिल्ली
एक डांस टीचर पर आईफोन की EMI का बोझ इतना बढ़ गया कि उन्होंने यमुना में छलांग लगा दी। पुलिस और फ्लड कंट्रोल डिपार्टमेंट की तत्परता से उनकी जान बचा ली गई। हालांकि कई सवाल भी खड़े हो गए हैं। मामला तब सामने आया है, जब महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में आईफोन की EMI विवाद में एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत की खबर चर्चा बनी हुई है।

क्या था पूरा मामला
पुलिस के मुताबिक, कालिंदी कुंज इलाके के भोला घाट पर शुक्रवार रात करीब 8:30 बजे अचानक लोगों ने शोर मचाया कि एक व्यक्ति यमुना में कूद गया है। पट्रोलिंग कर रहे हेड कॉन्स्टेबल शिवम और कॉन्स्टेबल आनंद गौतम बिना समय गंवाए मौके पर पहुंचे और तुरंत फ्लड कंट्रोल डिपार्टमेंट को सूचना देकर कर्मचारियों को बोट के साथ बुलाया। रेस्क्यू टीम ने डूबते शख्स को देख लिया और सुरक्षित बाहर निकाला। युवक की पहचान दीपक कुमार (30) के रूप में हुई है।

युवक ने क्यों लगाई यमुना में छलांग
पूछताछ में पता चला कि वह ओखला फेज-2 की संजय कॉलोनी में रहते हैं। पेशे से डांस टीचर हैं। परिवार में पत्नी और दो बच्चे हैं। पुलिस को दीपक ने बताया कि कुछ महीनों से उनकी आमदनी कम हो गई थी। इस कारण वह आईफोन की EMI नहीं चुका पा रहे थे। इससे काफी तनाव में थे। इसी दबाव में यमुना में छलांग लगा दी। पुलिस ने उनकी काउंसलिंग की। पत्नी और साले को बुलाया और समझा-बुझा कर घर भेजा।

रेस्क्यू टीम ने 15 दिनों में बचाई 5 जान
पुलिस के मुताबिक, पिछले 15 दिन के भीतर तुरंत रेस्पॉन्स और रेस्क्यू ऑपरेशन से 5 लोगों की जान बचाई जा चुकी है। यमुना किनारे संवेदनशील स्थानों पर लगातार पट्रोलिंग और स्थानीय लोगों से मिलने वाली सूचनाओं पर तत्काल प्रतिक्रिया देने से बचाव संभव हुआ है।

व्यवहार में आए बदलाव पर दें ध्यान'
राम मनोहर लोहिया अस्पताल के प्रोफेसर और साइकियाट्री एक्सपर्ट डॉ. लोकेश शेखावत के मुताबिक, बच्चों और युवाओं में आत्महत्या के कारण अलग-अलग हो सकते है। आज महंगे और ब्रैडेड मोबाइल स्टेटस सिंबल बनते जा रहे है। लोग महंगे मोबाइल तो खरीद लेते हैं, पर कई बार आर्थिक और सामाजिक दबाव में फंस जाते है और दबाव सहन नहीं कर पाते।

बच्चों के मामले में बरते ज्यादा सावधानी
वहीं, बच्चों के मामले में अभिभावक पर्याप्त समय नहीं दे पाते और उनके व्यवहार में आए बदलावों को नजर अंदाज करते हैं। मोबाइल को लेकर जिद होने पर बच्चों पर सीधे पाबंदी लगाने के बजाय बातचीत कर उसके फायदे-नुकसान समझाएं और समय-सीमा बच्चे से ही तय करवाएं। अगर बच्चा लगातार गुस्से, चिड़चिड़ेपन या व्यवहार में बदलाव से गुजर रहा है तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।

Aditya
Author: Aditya

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