सतना में बारिश से बाढ़ जैसे हालात,19 सड़कें प्रभावित, मंदाकिनी खतरे के निशान से ऊपर; तालाब की मेड़ टूटी, बस्ती में घुसा पानी…

सतना। जिले में पिछले 48 घंटे से हुई भारी बारिश के बाद शुक्रवार दोपहर बारिश थम गई, लेकिन आसमान में बादल छाए रहे। लगातार बारिश के कारण जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बाढ़ जैसे हालात बन गए। जिला मुख्यालय से जुड़ी 20 में से 19 सड़कों पर ग्रामीण क्षेत्रों का संपर्क प्रभावित हुआ है। बारिश रुकने के बावजूद कई इलाकों में हालात सामान्य नहीं हो सके हैं।
चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर अब भी खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ है। बाढ़ के दौरान कई सड़कों पर पानी भरने से नाव चलाने जैसी स्थिति बन गई थी। प्रशासन की टीमें प्रभावित क्षेत्रों पर नजर बनाए हुए हैं।
सतना-सेमरिया मार्ग पर आवागमन प्रभावित
सतना-सेमरिया मार्ग पर सेमरावल नदी का पानी पुल के ऊपर से बह रहा है, जिसके चलते इस मार्ग पर आवागमन बाधित है। वहीं जसो थाना क्षेत्र के दुबहिया में उफनाते रपटे को बाइक सवार जान जोखिम में डालकर पार करते दिखाई दिए। तेज बहाव के बावजूद लोगों के इस तरह रास्ता पार करने से हादसे का खतरा बना हुआ है।
अलहा तालाब की मेड़ टूटी, बस्ती में घुसा पानी
कोटर तहसील के अबेर गांव स्थित अलहा तालाब का जलस्तर बढ़ने के बाद उसकी मेड़ टूट गई। मेड़ टूटने से अबेर बस्ती में पानी भर गया और कई घरों में पानी घुसने से गृहस्थी का सामान खराब हो गया।
ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों की मदद से तालाब की मेड़ से तेजी से निकल रहे पानी को रोकने का प्रयास किया गया। घटना के बाद बस्ती के लोगों में चिंता का माहौल है।

पवैया विद्युत सब स्टेशन में घुटने तक पानी
कोठी क्षेत्र के पवैया विद्युत सब स्टेशन में भी बारिश का पानी भर गया है। यहां करीब घुटने तक पानी जमा होने की जानकारी सामने आई है। पानी भरने से विद्युत व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है। बिजली विभाग की टीम स्थिति पर नजर रख रही है।
20 लाख की लागत से बना रपटा पहली बारिश में बहा
उचेहरा जनपद की ग्राम पंचायत श्यामनगर के बसौरा गांव में गर्मी के दौरान करीब 20 लाख रुपए की लागत से बनाया गया रपटा पहली ही तेज बारिश में बह गया। रपटा बहने से बसौरा गांव का संपर्क पूरी तरह कट गया है।
अब ग्रामीणों और स्कूली बच्चों को उफनते नाले को पार करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए ठेकेदारी और कमीशनखोरी के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि यदि निर्माण मजबूत होता तो पहली बारिश में ही रपटा नहीं बहता।

करही खुर्द स्कूल में तीन फीट पानी
कोटर क्षेत्र की करही खुर्द प्राथमिक शाला में करीब तीन फीट पानी भर गया। पानी भरने से स्कूल कार्यालय में रखी अंकुर अभ्यास पुस्तिकाएं, किताब-कॉपियां और अन्य सामग्री भीग गई। शुक्रवार को शिक्षक स्कूल में मौजूद सामान और किताब-कॉपियों को सुखाते नजर आए।
स्कूल परिसर में जलभराव के कारण बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हुई है। ग्रामीणों ने जल निकासी की व्यवस्था कराने की मांग की है, ताकि भविष्य में बारिश के दौरान स्कूल में पानी न भर सके।
गौशाला में दो फीट पानी, भूसा खराब
सतना शहर के बगहा स्थित केशव माधव गौशाला में भी बारिश का पानी भर गया। शुक्रवार को भी गौशाला में करीब दो फीट पानी जमा था। जलभराव के कारण कई गौवंश फंस गए थे। साथ ही गौशाला में रखा लाखों रुपए का भूसा और अन्य सामान पानी में भीगकर खराब हो गया।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सांदीपनि विद्यालय के निर्माण में नियमों की अनदेखी के कारण बारिश का पानी गौशाला की ओर पहुंचा। इससे गौशाला में जलभराव की स्थिति बनी। लोगों ने प्रशासन से जल निकासी की स्थायी व्यवस्था कराने और निर्माण कार्य की जांच की मांग की है।
बारिश थमी, लेकिन खतरा अभी टला नहीं
शुक्रवार को बारिश थमने के बाद राहत जरूर मिली है, लेकिन मंदाकिनी समेत कई नदी-नालों का जलस्तर बढ़ा हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई मार्ग अभी भी प्रभावित हैं। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित गांवों का संपर्क बहाल करना और जलभराव वाले इलाकों में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
प्रशासन ने लोगों से उफनती नदियों, नालों और रपटों को पार नहीं करने की अपील की है। तेज बहाव वाले रास्तों पर थोड़ी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है।
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