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Microsoft की नौकरी छोड़ बनीं IAS! UPSC में 45वीं रैंक लाने वाली गार्गी जैन की प्रेरक कहानी

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 अलवर 
सफलता पाने के लिए बड़े पैकेज और आरामदायक लाइफ स्टाइल को छोड़ना हर किसी के बस की बात नहीं होती। लेकिन राजस्थान के अलवर की रहने वाली गार्गी जैन ने यह साबित कर दिखाया कि जब मन में देश सेवा का जज्बा हो, तो बड़े से बड़ा कॉर्पोरेट करियर भी छोटा नजर आने लगता है। गार्गी जैन ने विश्व प्रसिद्ध टेक कंपनी माइक्रोसॉफ्ट की नौकरी छोड़कर सिविल सर्विसेज की तैयारी की और देश में 45वीं रैंक हासिल कर आईएएस अफसर बनीं।

वर्तमान में गुजरात के आदिवासी बहुल जिले छोटा उदेपुर में जिला कलेक्टर के रूप में तैनात गार्गी जैन को वहां के लोग और खासतौर पर स्कूली लड़कियां प्यार से 'कलेक्टर दीदी' कहकर बुलाती हैं।

माइक्रोसॉफ्ट का लाखों का पैकेज छोड़ चुना UPSC का रास्ता
गार्गी जैन एक सामान्य परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके पिता रवींद्र जैन एनसीडीसी में टेक्नीशियन के पद पर कार्यरत थे और मां संगीता जैन हिंदी की लेक्चरर थीं। अपनी BTech इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद गार्गी का चयन दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी 'माइक्रोसॉफ्ट' में हो गया। वहां उन्हें शानदार सैलरी पैकेज और बेहतरीन करियर मिल रहा था, लेकिन उनके मन में हमेशा से समाज के लिए कुछ बड़ा करने की इच्छा थी। साल 2012 में उन्होंने अपनी यह ड्रीम जॉब छोड़ दी और यूपीएससी (UPSC) की तैयारी में पूरी तरह जुट गईं।

पहले प्रयास में मिली निराशा, दूसरे में गाड़े सफलता के झंडे
सिविल सर्विसेज का रास्ता आसान नहीं था। अपने पहले प्रयास में गार्गी जैन महज 12 अंकों के अंतर से कटऑफ पार करने से चूक गईं। इस असफलता से हताश होने के बजाय उन्होंने अपनी कमियों को पहचाना और दोगुने उत्साह के साथ दोबारा तैयारी शुरू की। उनकी कड़ी मेहनत रंग लाई और अपने दूसरे ही प्रयास में उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा में ऑल इंडिया 45वीं रैंक (AIR 45) हासिल कर ली।

छोटा उदेपुर में बनीं 'कलेक्टर दीदी'
2015 बैच की इस IAS अधिकारी को गुजरात कैडर मिला। छोटा उदेपुर जिले का कार्यभार संभालने के बाद उन्होंने वहां के सुदूर आदिवासी ग्रामीण इलाकों का दौरा करना शुरू किया। वे लगातार सरकारी स्कूलों का निरीक्षण करती हैं, बच्चों के साथ जमीन पर बैठकर बातें करती हैं और उनकी पढ़ाई का हाल चाल लेती हैं।

विशेष रूप से आदिवासी समाज की बेटियों को आगे बढ़ाने, उनके स्वास्थ्य, कुपोषण से बचाव और शिक्षा के लिए उनके द्वारा चलाए जा रहे अभियानों ने क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाया है। अधिकारियों और बच्चों के बीच की दूरी को मिटाने के उनके इस अनोखे अंदाज के कारण ही स्कूली बच्चे उन्हें अधिकारी के रूप में देखने के बजाय अपनी बड़ी बहन 'कलेक्टर दीदी' मानते हैं।

आईएएस गार्गी जैन का जीवन सफर देश के उन तमाम छात्रों और युवाओं के लिए एक जिंदादिली की मिसाल है जो अपने लक्ष्य को पाने के लिए किसी भी सुविधा का त्याग करने का साहस रखते हैं।

Aditya
Author: Aditya

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