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दिवाली-छठ पर फ्लाइट टिकट नहीं होंगे दोगुने-तिगुने, सरकार की नई तैयारी; किराये पर कड़ी निगरानी का प्लान

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नई दिल्ली

फेस्टिव सीजन और छुट्टियों में फ्लाइट के टिकट के दाम अप्रतयाशित रूप से न बढ़ें, इसके लिए केंद्र सरकार नियम बनाने की तैयारी में है. केंद्र के मुताबिक, एयर फेयर यानी हवाई किराये और चार्जेस से जुड़े नियम बनाने की प्रक्रिया चल रही है और इसे तैयार होने में 3 हफ्ते का समय लग सकता है. इन नियमों में हवाई किराये और चार्जेस से जुड़े ऐसे प्रावधान शामिल होंगे, जिनसे हवाई यात्रियों को राहत मिलेगी. दरअसल, फ्लाइट्स टिकटों के दाम अचानक बढ़ने को लेकर एयर पैसेंजर्स लंबे समय से शिकायतें करते रहे हैं. जैसे कि नॉर्मल डेज यानी सामान्‍य दिनों में दिल्‍ली में मुंबई का किराया 6,000 रुपये है तो गर्मी की छुट्टियों या फिर दिवाली जैसे फेस्टिवल के टाइम यही टिकट 12 से 14 हजार रुपये का हो जाता है। 

ऐसे मामलों की एक शिकायती याचिका पहुंची, सुप्रीम कोर्ट के पास और फिर कोर्ट ने सख्‍ती दिखाते हुए सरकार से रुख स्‍पष्‍ट करने को कहा. कोर्ट में सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ने बताया कि सरकार इस पर नियम बना रही है। 

नियम नहीं मानें एयरलाइंस तो फ्लाइट्स रोक दें: सुप्रीम कोर्ट 
सुप्रीम कोर्ट ने त्योहारों में टिकटों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी को लेकर सख्‍ती से कहा है कि एयरलाइंस अगर नियम नहीं मानतें तो उनकी उड़ाने रोक दी जाएं. त्योहारों और छुट्टियों के दौरान हवाई टिकटों के दाम अचानक बढ़ने पर दायर सामाजिक कार्यकर्ता एस लक्ष्मीनारायणन की याचिका पर सोमवार को जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सुनवाई की. उन्‍होंने कहा कि यात्रियों के हित में जो व्यवस्थाएं बनाई गई हैं, उसके पालन और नियमन को लेकर फिलहाल स्थिति साफ नहीं है। 

याचिकाकर्ता ने कहा यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि केंद्रीय नागर विमानन मंत्री ने संसद में कहा है कि हम कुछ नहीं कर सकते. हम कोई कैपिंग नहीं लगा सकते. पिछली सुनवाई में पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि किराया तय करने में एयरलाइंस कंपनियों की मनमानी यात्रियों का शोषण करने जैसा है और सरकार को यात्रियों को राहत देने के लिए कदम उठाने चाहिए। 

7 सितंबर को अगली सुनवाई, सामने आ सकता है नियम 
कोर्ट में सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) अनिल कौशिक ने बताया कि हवाई किराये और शुल्क से जुड़े नियम बनाने की प्रक्रिया अंतिम दौर में है. इसे पूरा होने में 3 हफ्तों का समय लगेगा. उन्होंने कहा कि अंतिम रूप में तैयार नियमों को कोर्ट के सामने रखा जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने तीन हफ्ते की मांग की दलील स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर तय कर दी है। 

सामाजिक कार्यकर्ता एस लक्ष्मीनारायणन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर एयरलाइंस पर किराया तय करने में मनमानी का आरोप लगाते हुए कोर्ट के दखल की मांग की थी. याचिका में कहा गया है कि प्राइवेट एयरलाइंस कंपनियां अनुचित तरीके से हवाई किराया तय करती हैं. उनकी तरफ से कई अतिरिक्त शुल्क लगाए जाते हैं. इस बारे में स्पष्ट नियम बनाने और उन नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए एक नियामक संस्था के गठन की जरूरत है। 

Aditya
Author: Aditya

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