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Child Abuse Content Case: सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया कंपनियों को घेरा, CSEAM की रिपोर्टिंग पर केंद्र से मांगा जवाब

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नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया और दूसरे ऑनलाइन मंचों पर बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़े कंटेंट को लेकर गंभीर चिंता जताई है. अदालत ने केंद्र सरकार से उस याचिका पर जवाब मांगा है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि कुछ ऑनलाइन मंच ऐसी सामग्री की जानकारी भारत की स्थानीय पुलिस या खासतौर से पॉक्सो मामलों पर नजर रखने वाली पुलिस इकाई को सीधे देने के बजाय अमेरिका स्थित संस्था एनसीएमईसी को रिपोर्ट कर रहे हैं। 

याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ मंचों पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट को बढ़ावा देने वाले भुगतान वाले विज्ञापन तक चलाए जा रहे हैं. याचिकाकर्ताओं ने ऐसे मामलों की पहचान, रिपोर्टिंग, डिजिटल सबूत सुरक्षित रखने और आईपी पते जैसी जानकारी जांच एजेंसियों के साथ साझा करने के लिए सभी ऑनलाइन मंचों के लिए एक समान मानक प्रक्रिया बनाने की मांग की है। 

पॉक्सो के तहत सीधे पुलिस को रिपोर्टिंग का मुद्दा
मामले में सुप्रीम कोर्ट के 2024 के उस फैसले का भी हवाला दिया गया है, जिसमें ऑनलाइन मंचों पर पॉक्सो कानून के तहत रिपोर्टिंग की जिम्मेदारी को स्पष्ट किया गया था. अदालत ने कहा था कि ऐसे मंचों को बच्चों के यौन शोषण से जुड़े मामलों की जानकारी स्पेशल जुवेनाइल पुलिस यूनिट, स्थानीय पुलिस या साइबर अपराध पोर्टल तक पहुंचानी होगी। 

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि पॉक्सो के तहत तय जिम्मेदारियों का पालन किए बिना ऑनलाइन मंच आईटी एक्ट के तहत मिलने वाली सुरक्षित संरक्षण की सुविधा का दावा नहीं कर सकते. पॉक्सो नियमों में ऐसे मामलों में जरूरी कंटेंट और उसके सोर्सेज से जुड़ी जानकारी पुलिस को सौंपने की जिम्मेदारी भी बताई गई है। 

राष्ट्रीय अपराधी डेटाबेस में नाम जोड़ने की मांग
याचिका में बच्चों के यौन शोषण से जुड़े मामलों में शामिल लोगों को कानून के मुताबिक, राष्ट्रीय यौन अपराधी डेटाबेस में जल्द शामिल करने की मांग भी की गई है. साथ ही, कानून के तहत अनिवार्य रिपोर्टिंग नहीं करने वाले ऑनलाइन मंचों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग की गई है। 

याचिकाकर्ताओं ने एक केंद्रीकृत ऑनलाइन पोर्टल बनाने का सुझाव भी दिया है, जहां ऑनलाइन मंच ऐसे मामलों की रिपोर्ट कर सकें और डिजिटल सबूत साझा कर सकें। 

सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और कानून एवं न्याय मंत्रालय को मामले में पक्षकार बनाए जाने की अनुमति दी है. केंद्र को अगली सुनवाई से दो हफ्ते पहले अपना जवाब दाखिल करने को कहा गया है. मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर को होगी। 

Aditya
Author: Aditya

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