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दिल्ली में BWF World Championships की तैयारी पूरी, कबूतरों पर कंट्रोल और बंदरों की निगरानी के लिए हाईटेक प्लान

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नई दिल्ली

सोचिए… वर्ल्ड चैंपियनशिप का मैच चल रहा हो और तभी ऊपर से कबूतर की एंट्री हो जाए! कबूतर पॉटी करके कोर्ट खराब कर दें और मैच रुक जाए. प्लेयर्स आगे मुकाबला खेलने से ही इनकार कर दें! कुछ ऐसी ही शर्मिंदगी इस साल जनवरी में हुए इंडिया ओपन बैडमिंटन के दौरान हुई थी. इतना ही नहीं, स्टेडियम के आसपास बंदर की मौजूदगी ने भी खूब सुर्खियां बटोरीं थीं. अब दिल्ली में 17 अगस्त से शुरू होने जा रही BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप से पहले आयोजकों ने ठान लिया है कि इस बार कोर्ट पर सिर्फ खिलाड़ी दिखेंगे, कोई ‘पंख वाला मेहमान’ नहीं। 

नॉन टॉक्सिक जेल और खास मशीन
इस बड़े टूर्नामेंट के लिए इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम को हाईटेक तरीके से तैयार किया जा रहा है. स्टेडियम में खास नॉन-टॉक्सिक स्लिपरी जेल लगाया गया है. यह जेल पक्षियों को नुकसान नहीं पहुंचाता, लेकिन उन्हें कोर्ट और स्टेडियम की संरचनाओं पर बैठने से रोकता है. इसके अलावा अमेरिका से शिकारी पक्षियों की आवाज निकालने वाली खास मंगाई मशीनें मंगाई गईं है. इन आवाजों से कबूतरों को खतरे का एहसास होता है और वे स्टेडियम से दूर रहते हैं। 

इस बार पूरे स्टेडियम का कायाकल्प हो गया
दरअसल, इंडिया ओपन के दौरान डेनमार्क की खिलाड़ी मिया ब्लिकफेल्ट ने प्रैक्टिस कोर्ट की सफाई और पक्षियों की समस्या को लेकर सवाल उठाए थे. एक अन्य खिलाड़ी एंडर्स एंटोनसेन ने वायु प्रदूषण का हवाला देते हुए टूर्नामेंट से नाम वापस ले लिया था. जिसके बाद आयोजकों, खेल मंत्रालाय और भारत सरकार की जमकर किरकिरा हुई थी. अब अब स्टेडियम का पूरा लुक बदल दिया गया है. नई सीटें, नया वुडन कोर्ट, आधुनिक लाइटिंग सिस्टम और छत की वाटरप्रूफिंग जैसे काम हो चुके हैं। 

1982 एशियन गेम्स के लिए बनाया गया था स्टेडियम
17 साल बाद वर्ल्ड चैंपियनशिप भारत लौट रही है. 17 से 23 अगस्त तक 400 से ज्यादा खिलाड़ी एक्शन में नजर आएंगे. यह इनडोर स्टेडियम मूल रूप से 1982 के एशियाई खेलों के लिए बनाया गया था और 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए इसे 
रिनोवेट किया गया था. अब इसे फाइनल टच दिया जा रहा है। 

Aditya
Author: Aditya

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