गैविनाथ धाम की जलधारी व्यवस्था के विरोध में बिरसिंहपुर बंद, गर्भगृह में प्रवेश की मांग…

रेवांचल रोशनी। सतना जिले के बिरसिंहपुर स्थित प्राचीन गैविनाथ धाम में शिवलिंग के जलाभिषेक के लिए लागू की गई जलधारी व्यवस्था का स्थानीय लोगों द्वारा विरोध किया जा रहा है। मंगलवार को विरोध के समर्थन में बिरसिंहपुर बंद रखा गया, जिसका बाजार में व्यापक असर देखने को मिला। अधिकांश व्यापारियों ने अपनी दुकानें बंद रखकर विरोध का समर्थन किया।

स्थानीय लोगों, व्यापारियों और आसपास के ग्रामीणों की मांग है कि जलधारी व्यवस्था को हटाकर श्रद्धालुओं को पहले की तरह गर्भगृह में प्रवेश देकर सीधे शिवलिंग का जलाभिषेक और पूजा करने की अनुमति दी जाए।
भजन-कीर्तन के साथ निकाला शांतिपूर्ण मार्च
बंद के दौरान व्यापारियों, समाजसेवियों और युवाओं ने भजन-कीर्तन करते हुए शांतिपूर्ण मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जलधारी व्यवस्था लागू होने के बाद श्रद्धालुओं को सीधे शिवलिंग का जलाभिषेक करने का अवसर नहीं मिल पा रहा है।
स्थानीय लोगों ने दावा किया कि सावन के दूसरे सोमवार को भी मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की अपेक्षित भीड़ दिखाई नहीं दी, जबकि पहले सावन के दौरान बड़ी संख्या में भक्त यहां पहुंचते रहे हैं।
गर्भगृह में प्रवेश पर प्रशासन ने लगाई रोक
स्थानीय लोगों का आरोप है कि मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ को लेकर प्रशासन को सही जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने मांग की है कि सोमवार को छोड़कर अन्य सामान्य दिनों में जलधारी के माध्यम से अभिषेक की व्यवस्था समाप्त की जाए और भक्तों को गर्भगृह में जाकर सीधे शिवलिंग की पूजा-अभिषेक करने की अनुमति दी जाए।
वहीं, प्रशासन ने सावन के दौरान संभावित भीड़ को देखते हुए गैविनाथ मंदिर के गर्भगृह में श्रद्धालुओं के प्रवेश पर रोक लगाई है। प्रशासन के अनुसार दूर-दराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने और गर्भगृह में सीमित स्थान होने के कारण भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जलधारी के माध्यम से जलाभिषेक की व्यवस्था की गई है।
फिलहाल जलधारी व्यवस्था को लेकर स्थानीय लोगों और प्रशासन के बीच मतभेद सामने आया है। श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की मांग है कि व्यवस्था पर पुनर्विचार कर उन्हें सीधे गर्भगृह में पूजा-अभिषेक का अवसर दिया जाए।









