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कांवड़ यात्रा में दिखी आस्था की मिसाल, कोई पहली बार तो कोई 21 साल से निभा रहा परंपरा

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फरीदाबाद.

सावन के पावन महीने में हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौट रहे कांवड़ियों की आस्था और उत्साह देखते ही बन रहा है। आगरा नहर मार्ग पर लगे कांवड़ शिविरों में इस बार बड़ी संख्या में ऐसे शिवभक्त हैं, जो पहली बार कांवड़ लेकर आए हैं।

कई ऐसे हैं, जो वर्षों से लगातार कांवड़ ला रहे हैं। इनके लिए यह यात्रा केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि जीवन का एक महत्वपूर्ण अनुभव बन चुकी है। कांवड़ यात्रा अब अपने अंतिम चरण में है। मंगलवार से आगरा नहर मार्ग पर कई कांवड़ शिविर हटने शुरू हो जाएंगे। शिविर संचालक और सेवादार व्यवस्थाएं समेटने की तैयारी में हैं। दरअसल, 11 अगस्त को शिव का महाभिषेक है। 11 अगस्त के बाद ज्यादातर कांवड़िए जल चढ़ा चुके होंगे। हालांकि कांवड़ यात्रा तो पूरे सावन माह तक चलती रहेगी।

इन शिविरों में कांवड़ियों के ठहरने, भोजन, चिकित्सा और आराम की व्यवस्था है। कई स्थानों पर 24 घंटे भंडारे चल रहे हैं। स्वयंसेवक दिन-रात कांवड़ियों की सेवा में जुटे हैं। पहली बार कांवड़ लाने वाले श्रद्धालुओं में खासा उत्साह नजर आ रहा है। उनका कहना है कि रास्ते की थकान के बावजूद शिविरों में मिलने वाली सेवा और अन्य कांवड़ियों का सहयोग नई ऊर्जा देता है।

हम 21 वर्षों से कांवड़ शिविर लगा रहे हैं। 10 साल तक वाइएमसीए के पास शिविर लगाते थे, अब 11 साल से बीपीटीपी पुल पर शिविर लगा रहे हैं। शिविर में सभी प्रकार की सुविधाएं मौजूद हैं। शिवभक्तों की सेवा करके बड़ा सुकून मिलता है।
-बलबीर सिंह, शिवकांवड़ सेवा समिति।

मैं 13 साल से कांवड़ ला रहा हूं। सावन के महीने में यह धार्मिक यात्रा मुझे मानसिक, शारीरिक और धार्मिक लाभ का अनुभव कराती है। इस यात्रा से पहले मैं बीमार रहा करता था, लेकिन जब से यह शुरू की है, तब से कोई कष्ट नहीं है।
– हरीचंद, फतेहपुर तगा

मैं पहली तीसरी बार कांवड़ ला रहा हूं। पहले दो बार कलश में जल लाया था लेकिन इस बार बोले बाबा को कंधे पर बैठाकर ला रहा हूं। भगवान की मर्जी रही तो हर बार कांवड़ लाया करूंगा।
– प्रिंस, बल्लभगढ़

मैं तो पहली बार कांवड़ लेकर आई हूं। अकेले ही घर से हरिद्वार चली गई थी। मुझे काफी शारीरिक कष्ट पहुंचा है लेकिन पहली बार का अनुभव ऐसा ही होता है। भोले की मर्जी होगी तो अगले साल भी लेकर आऊंगी।
– कृष्णा, थंथरी, पलवल।

Aditya
Author: Aditya

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