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भारत ने कम खरीदा कच्चा तेल, फिर भी 26% बढ़ गया आयात बिल

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नई दिल्ली
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत का कच्चा तेल आयात बिल पिछले साल के मुकाबले 26% बढ़ गया, जबकि इंपोर्ट वॉल्यूम में 18% की गिरावट आई। यानी कम तेल मंगाने के बावजूद भारत का क्रूड ऑयल बिल एक चौथाई बढ़ गया। पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण सप्लाई में रुकावट आई और कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गईं। इस दौरान कच्चा तेल 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया था। हालांकि हाल में इसमें गिरावट आई है। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड 83.55 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ।

वाणिज्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, भारत ने इस साल अप्रैल और जून के बीच कुल 59.7 मिलियन टन कच्चा तेल आयात किया, जो पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में 73 मिलयन टन था। हालांकि इस दौरान आयात बिल अप्रैल-जून 2025 के 39 अरब डॉलर से बढ़कर 49 अरब डॉलर हो गया। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक देश है और अपनी जरूरत का 88% हिस्सा आयात से पूरा होता है।

क्यों बढ़ा आयात का बिल?
टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक 28 फरवरी को अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने से पहले कच्चे तेल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल से कम थीं, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य से शिपमेंट में रुकावट आने के बाद इनमें भारी उछाल आई। यहां से दुनिया का 20 फीसदी कच्चा तेल गुजरता है। भारत का लगभग 40% कच्चा तेल आयात इसी रास्ते से होता है। ईरान युद्ध के चरम पर ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। रुपये की कमजोरी ने भी आयात बिल को बढ़ाने में भूमिका निभाई।

भारत हर साल 1.8 से 2 अरब बैरल कच्चा तेल आयात करता है। तेल की कीमत में प्रति बैरल 1 डॉलर की बढ़ोतरी से उसके तेल आयात बिल में 2 अरब डॉलर तक का इजाफा हो सकता है। फ्रेट, इंश्योरेंस और वॉर-रिस्क प्रीमियम में अंतर के कारण अलग-अलग देशों से खरीदे गए कच्चे तेल की औसत लागत अलग-अलग थी। जून तिमाही के दौरान रूस से सप्लाई की औसत लागत 2,408 डॉलर प्रति टन रही जबकि UAE के कच्चे तेल की लागत 2,213 डॉलर प्रति टन थी।

कौन है सबसे बड़ा सप्लायर?
एक सरकारी रिफाइनिंग कंपनी के अधिकारी ने कहा, "उस समय हमारी प्राथमिकता 1.4 अरब लोगों के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जहां से भी संभव हो, सप्लाई हासिल करना थी।" उन्होंने आगे कहा कि संघर्ष से पहले मिलने वाली छूट खत्म हो गई थी और रिफाइनरों को भारी वॉर-रिस्क प्रीमियम चुकाने के लिए मजबूर होना पड़ा।

पहली तिमाही में रूस एक बार फिर भारत का टॉप क्रूड सप्लायर बना रहा। कुल आयात में उसकी हिस्सेदारी 40% से अधिक रही। उसके बाद संयुक्त अरब अमीरात (14.6%), सऊदी अरब (9.9%), वेनेज़ुएला (5.2%) और ओमान (4.5%) प्रमुख सप्लायर थे।

 

Aditya
Author: Aditya

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