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यूपी के मिशन शक्ति केंद्रों में सात कर्मियों की तैनाती अनिवार्य, DGP ने दिए निर्देश

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लखनऊ
महिलाओं व बालिकाओं की सुरक्षा के लिए पुलिस थानों में स्थापित किए गए मिशन शक्ति केंद्रों में तैनात कर्मियों की ड्यूटी अब पुलिस दूसरे कामों में नहीं लगा सकेगी। कानून व्यवस्था से जुड़े किसी विशेष मामले में अगर इन केंद्रों के कर्मियों की ड्यूटी लगाई जाती है तो भी कम से कम दो महिला कर्मियों सहित कुल चार कर्मी ड्यूटी पर तैनात रहेंगे।

पुलिस मुख्यालय द्वारा पिछले माह राज्य के 1663 पुलिस थानों में स्थापित किए गए मिशन शक्ति केंद्रों का औचक निरीक्षण किया गया था। इस दौरान कई केंद्रों में निर्धारित संख्या से कम कर्मियों की तैनाती पाई गई थी।

सभी पुलिस प्रमुखों को दिए निर्देश
साथ ही कई केंद्रों में कंप्यूटर, इंटरनेट व बीट भ्रमण के लिए वाहन की सुविधा मौके पर उपलब्ध नहीं मिली। नतीजतन डीजीपी राजीव कृष्ण ने मिशन शक्ति केंद्रों के संचालन के लिए तैयार की गई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के पालन के निर्देश सभी जिलों के पुलिस प्रमुखों को दिए हैं।

एसओपी के तहत प्रत्येक मिशन शक्ति केंद्र पर न्यूनतम सात और अधिकतम 22 कर्मियों की तैनाती होनी चाहिए। साथ ही इन्हें बीट भ्रमण के लिए वाहनों की उपलब्धता सुनिश्चित कराई जानी थी, लेकिन कई केंद्रों में अभी तक वाहनों की सुविधा उपलब्ध न होने के कारण केंद्रों में पर तैनात कर्मी बीट भ्रमण पर नहीं जा रहे हैं।

एसओपी के अनुसार मिशन शक्ति केंद्रों में आने वाली शिकायतों व उससे संबंधित जानकारी निर्धारित कंप्यूटरों (आनलाइन) में दर्ज की जानी चाहिए। इसके बाद भी कई केंद्रों में रजिस्टरों में ही शिकायतें दर्ज की जा रही हैं।

इसे लेकर भी डीजीपी ने नाराजगी जताई है उन्होंने स्पष्ट किया है कि मिशन शक्ति केंद्रों में आने वाली शिकायतें व उनके निस्तारण की सूचना आनलाइन दर्ज की जाए, जिससे बाद में डाटा अपलोड करने की जरूरत न पड़े।

 

Aditya
Author: Aditya

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