MP में 23 जिले नल-जल कवरेज में पिछड़े, 8 जिलों में आधे परिवारों तक भी नहीं पहुंचा पानी…

मऊगंज और मैहर की स्थिति सबसे कमजोर, सीहोर में 43% और विदिशा में 33% परिवार नल जल कनेक्शन से वंचित
प्रथम न्याय न्यूज। मध्य प्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत हर घर तक नल का पानी पहुंचाने के दावे के बीच जिला स्तर के आंकड़े कई जिलों की अलग तस्वीर सामने ला रहे हैं। प्रदेश के 55 जिलों में से 23 जिले ऐसे हैं, जहां घरेलू नल जल कवरेज 70 प्रतिशत से भी कम है। वहीं, 8 जिलों में आधे से अधिक परिवार अभी भी घरेलू नल जल कनेक्शन से वंचित हैं।
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में फिलहाल 77.21 प्रतिशत परिवारों तक नल के जरिए पानी पहुंचने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, जिलों के स्तर पर कवरेज में काफी अंतर देखने को मिल रहा है। मऊगंज में सबसे कम 49.86 प्रतिशत परिवारों तक ही नल जल पहुंचा है। वहीं मैहर में यह आंकड़ा 40.20 प्रतिशत बताया गया है।

सीहोर में 43%, विदिशा में 33% परिवार वंचित
सीहोर जिले में 56.95 प्रतिशत परिवारों तक ही घरेलू नल जल कनेक्शन पहुंच पाया है। इसका मतलब है कि करीब 43 प्रतिशत परिवार अभी इस सुविधा से वंचित हैं। इसी तरह विदिशा में नल जल कवरेज 66.67 प्रतिशत है और करीब 33 प्रतिशत परिवारों तक अभी घरेलू नल कनेक्शन नहीं पहुंचा है।
23 जिले 70 प्रतिशत से नीचे
प्रदेश के 23 जिलों में नल जल कवरेज 70 प्रतिशत से कम है। इनमें मऊगंज, अशोकनगर, पन्ना, सतना, अलीराजपुर, छतरपुर, सिंगरौली, मैहर, जबलपुर, बड़वानी, डिंडोरी, टीकमगढ़, रतलाम, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, गुना, नीमच, रीवा, शिवपुरी और सीधी सहित अन्य जिले शामिल हैं।
इन जिलों में कई स्थानों पर ग्रामीण परिवारों को अभी भी घरेलू नल कनेक्शन का इंतजार है। इससे जल जीवन मिशन के तहत निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने की चुनौती सामने आती है।
बड़े जल प्रोजेक्ट पूरे होने पर बढ़ सकता है कवरेज
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) के अनुसार कम नल जल कवरेज वाले अधिकांश जिले बहु-ग्राम जल योजनाओं (MVS) और थोक जल आपूर्ति परियोजनाओं पर निर्भर हैं। कई परियोजनाएं अभी निर्माण, कार्यान्वयन या पूर्णता के अलग-अलग चरणों में हैं।
विभाग का कहना है कि इन बड़े जल प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद संबंधित जिलों में घरेलू नल जल कनेक्शन की संख्या बढ़ेगी और कवरेज में सुधार आने की उम्मीद है।
155 प्रयोगशालाओं में पानी की गुणवत्ता की जांच
प्रदेश में पेयजल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कुल 155 प्रयोगशालाएं संचालित हैं। इनमें 103 उप-मंडल स्तर, 51 जिला स्तर और एक राज्य स्तरीय प्रयोगशाला शामिल है।
इन सभी प्रयोगशालाओं में माइक्रोबायोलॉजिकल जांच की सुविधा उपलब्ध है। हालांकि, बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD) की जांच केवल राज्य स्तरीय प्रयोगशाला में की जाती है। वहीं, रासायनिक विषाक्तता की जांच के लिए फिलहाल प्रयोगशाला स्तर पर सुविधा उपलब्ध नहीं है।
जल जीवन मिशन का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों तक सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल पहुंचाना है। ऐसे में जिला स्तर पर कम कवरेज वाले क्षेत्रों में लंबित परियोजनाओं को समय पर पूरा करना और पानी की गुणवत्ता की नियमित निगरानी करना महत्वपूर्ण चुनौती बनी हुई है।









