Edition

एक किलो का ट्यूमर निकाल महिला को दिया नया जीवन

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

रायपुर

छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने एक अत्यंत जटिल और उच्च जोखिम वाली सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। सिम्स के डॉक्टरों ने दर्रीघाट (बिलासपुर) निवासी 78 वर्षीय बुजुर्ग महिला के बाएं अंडाशय से लगभग 1 किलोग्राम वजन का कैंसरयुक्त ट्यूमर सुरक्षित बाहर निकालकर उन्हें नया जीवन प्रदान किया है।

आयुष्मान भारत योजना के तहत पूरा इलाज और जटिल ऑपरेशन हुआ बिल्कुल मुफ्त   

निजी अस्पताल ने बताया था 3 लाख का खर्च, आयुष्मान योजना से मुफ्त हुआ इलाज, मरीज पिछले 5-6 महीनों से पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द और तेजी से बढ़ रही गांठ से पीड़ित थीं। परिजन पहले उन्हें एक निजी अस्पताल ले गए थे, जहां जांच के बाद ऑपरेशन व इलाज के लिए 2 से 3 लाख रुपये का खर्च बताया गया। आर्थिक तंगी के कारण परिवार चिंतित था। इसके बाद मरीज को सिम्स, बिलासपुर में भर्ती कराया गया, जहां आयुष्मान भारत योजना के तहत उनका पूरा इलाज और जटिल ऑपरेशन बिल्कुल मुफ्त किया गया।

15×12×10 सेमी का विशाल ट्यूमर और 3 अगस्त को सफल सर्जरी      

सोनोग्राफी जांच में रेडियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह ने पाया कि मरीज के बाएं अंडाशय में 15×12×10 सेंटीमीटर आकार का विशाल ट्यूमर था, जो आसपास के अंगों पर भारी दबाव डाल रहा था। इसके बाद बहुविषयक विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने 3 अगस्त 2026 को कैंसर की चरण निर्धारण शल्य चिकित्सा, ट्यूमर भार कम करने, गर्भाशय एवं दोनों अंडाशयों को निकालने, बाईं मूत्रवाहिनी की मरम्मत और उसमें श्डबल-जे स्टेंटश् प्रत्यारोपण जैसी बेहद जटिल प्रक्रियाओं को सफलता पूर्वक पूरा किया।

विशेषज्ञ डॉक्टरों की संयुक्त टीम ने हासिल की सफलता     

इस चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन में विभिन्न विभागों की टीमों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। गायनेकोलॉजिकल सर्जरी टीम के विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. संगीता रमन जोगी, डॉ. दीपिका, डॉ. सौम्या और डॉ. वर्षा, जनरल सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. रघुराज सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. बी. डी. तिवारी और डॉ. गरिमा और एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. मधुमिता मूर्ति, डॉ. बी. रायजादा, डॉ. एस. कुजूर और डॉ. एम. देववर्मा का इस सफल आपरेशन में का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

डॉक्टरों ने बताया अत्यंत दुर्लभ और चुनौतीपूर्ण मामला  

सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति और चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने बताया कि रजोनिवृत्ति के बाद इस आकार का कैंसर ट्यूमर होना बेहद दुर्लभ और जोखिम भरा होता है। ऑपरेशन के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव और आंत व मूत्राशय जैसे महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। हालांकि, डॉक्टरों के सटीक संज्ञाहरण प्रबंधन और उच्च स्तरीय कौशल से मरीज का सुरक्षित ऑपरेशन संपन्न हुआ। मरीज की हालत संतोषजनक है और वे डॉक्टरों की निगरानी में स्वास्थ्य लाभ ले रही हैं। मरीज के परिजनों ने जीवनरक्षक मुफ्त इलाज के लिए सिम्स प्रबंधन और डॉक्टरों का आभार जताया है।

Aditya
Author: Aditya

Share करें

✓ Link copy हो गया!

Leave a Comment

और पढ़ें

error: Content is protected !!