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लाल डोरा विस्तार और फ्रीहोल्ड पर फैसला टला, चंडीगढ़ के हजारों परिवारों की बढ़ी चिंता

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चंडीगढ़.

शहर में प्रॉपर्टी से जुड़े अहम मुद्दों पर लंबे समय से राहत की उम्मीद लगाए बैठे हजारों लोगों को अभी और इंतजार करना होगा। लोकसभा में सांसद मनीष तिवारी द्वारा उठाए गए सवालों के जवाब में चंडीगढ़ प्रशासन ने केंद्र सरकार को बताया है कि नगर निगम क्षेत्र के 22 गांवों में लाल डोरा क्षेत्र बढ़ाने का फिलहाल कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।

वहीं पुनर्वास (रीहैबिलिटेशन) कॉलोनियों के निवासियों को उनके मकानों का मालिकाना हक देने का प्रस्ताव गृह मंत्रालय के पास मंजूरी के लिए लंबित है। प्रशासन के इस जवाब का असर उन हजारों परिवारों पर पड़ेगा, जो वर्षों से अपने मकानों के नियमितीकरण और मालिकाना हक का इंतजार कर रहे हैं। यदि केंद्र सरकार से मंजूरी मिलती है तो पुनर्वास कॉलोनियों के लोगों को अपनी संपत्ति पर कानूनी अधिकार मिलने का रास्ता साफ हो सकता है। फिलहाल इस मामले में अंतिम निर्णय केंद्र सरकार को लेना है। जवाब में प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि चंडीगढ़ में शेयर-वाइज प्रॉपर्टी की बिक्री, एक मकान को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर बेचने तथा फेज-1 के रिहायशी क्षेत्रों में फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) बढ़ाने जैसे मामलों में सुप्रीम कोर्ट के 10 जनवरी, 2023 के आदेश लागू हैं। इन आदेशों के कारण नियमों में किसी तरह की ढील देना संभव नहीं है।

इसी वजह से रिहायशी क्षेत्रों में री-डेंसिफिकेशन का प्रस्ताव भी आगे नहीं बढ़ पाया है। हालांकि, चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) के मकान मालिकों के लिए राहत की बात यह है कि नीड बेस्ड चेंज की सुविधा पहले की तरह जारी रहेगी। बोर्ड द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के तहत लोग निर्धारित नियमों के अनुसार अपने मकानों में आवश्यक निर्माण और बदलाव करा सकते हैं। इससे उन परिवारों को सुविधा मिलेगी, जिन्हें बढ़ते परिवार या अन्य जरूरतों के कारण मकानों में परिवर्तन करना पड़ता है। प्रशासन ने सहकारी आवास समितियों की संपत्तियों के हस्तांतरण को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की है। ऐसे मामलों में वर्तमान नियमों के अनुसार अनअर्न्ड इन्क्रीज की वसूली जारी रहेगी और इसमें फिलहाल कोई बदलाव प्रस्तावित नहीं है।

मुद्दे लंबे समय से चर्चा का विषय
चंडीगढ़ में प्रॉपर्टी से जुड़े ये मुद्दे लंबे समय से लोगों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं। खासकर लाल डोरा विस्तार, पुनर्वास कॉलोनियों को फ्रीहोल्ड करने और मकानों में निर्माण संबंधी नियमों को लेकर लोग राहत की मांग कर रहे हैं। प्रशासन के ताजा जवाब से साफ है कि मामलों में फिलहाल यथास्थिति बनी रहेगी और कई महत्वपूर्ण फैसलों के लिए केंद्र सरकार की मंजूरी का इंतजार करना होगा।

Aditya
Author: Aditya

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