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दुर्ग में जाति प्रमाण पत्र जांच पर बड़ा फैसला, 115 आवेदन हुए निरस्त

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भिलाई नगर.

भिलाई नगर पालिक निगम ने जाति एवं मूल निवास की उद्घोषणा के लिए प्राप्त 134 आवेदनों की जांच पूरी कर ली है। गठित 7 सदस्यीय जांच समिति ने रिपोर्ट सौंपी है। अब यह प्रकरण सामान्य सभा में विचार के लिए रखा जाएगा।

शासन की मंशा यह थी कि 1950 के पूर्व के रिकॉर्ड जिनके पास नहीं है, ऐसे हितग्राहियों के लिए सरलीकरण कर जाति प्रमाण पत्र बनाना था, परंतु यहां शासन के निर्देशों का उल्लंघन कर मात्र दो हितग्राहियों के प्रमाण पत्र को जांच समिति ने स्वीकृत किया है। अन्य के दस्तावेज 1950 के पूर्व के नहीं होने के कारण 115 आवेदन को निरस्त कर दिया है। इस मामले में भिलाई नगर निगम में दर्जन भर पार्षदों ने आवेदन किए थे, जिन्हें 60 वर्ष होने के बाद भी 1950 के पूर्व का रिकॉर्ड नहीं होने के कारण निरस्त कर दिए हैं। अब यह मामला सामान्य सभा में काफी गरमाने वाला है।

छत्तीसगढ़ शासन के 11 जनवरी 2018 के निर्देश के तहत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के ऐसे व्यक्ति, परिवारों के लिए यह प्रक्रिया है जिनके पास जाति-मूल निवास का कोई दस्तावेजी प्रमाण नहीं है। निगम क्षेत्र से ऐसे आवेदनों की पहचान कर सामान्य सभा की बैठक 16 अगस्त 2023 में जांच समिति बनाई गई थी।

आगे की प्रक्रिया
निगम ने बताया कि इस प्रस्ताव को पहले 27 मई 2025 को महापौर परिषद में रखा गया था। सलाहकार समिति की 10 जून 2025, 25 जून 2025 और 08 सितंबर 2025 की बैठकों में कोई निर्णय नहीं हो सका। 21 मई 2026 को आयुक्त ने सभी आवेदनों को पुनः महापौर परिषद में विचारार्थ प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। अब अंतिम निर्णय महापौर परिषद लेगी।

पात्र-अपात्र की सूची तैयार
निगम अधिकारियों का कहना है कि शासन के दिशा-निर्देशों के अनुसार ही पात्र-अपात्र की सूची तैयार की गई है, ताकि जरूरतमंदों को बिना दस्तावेज के भी जाति प्रमाण पत्र मिल सके। आदिम जाति कल्याण विभाग प्रभारी नवीन साहू ने बताया कि उक्त प्रकरण को सामान्य सभा में लाया जाएगा। शहर सरकार एवं 70 पार्षद उक्त प्रकरण में अपनी सहमति देगे ।

Aditya
Author: Aditya

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