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आरटीओ में सिस्टम बदला या सिर्फ चेहरे? पुराने विवादों के बीच फिर उठे नए सवाल!…..

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बाहरी व्यक्ति की भूमिका, अधिकारियों की अनुपस्थिति और कार्यप्रणाली पर उठ रहे प्रश्न; निष्पक्ष जांच की मांग तेज….

AI से बनाई गई व्यंगात्मक कार्टून फोटो।
AI से बनाई गई व्यंगात्मक कार्टून फोटो।
सतना का आरटीओ कार्यालय एक बार फिर अपनी कार्यप्रणाली को लेकर चर्चाओं में है। बीते दिनों कथित मार्किंग सिस्टम को लेकर विवाद सामने आने के बाद माना जा रहा था कि व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी, लेकिन अब स्थानीय लोगों और विभागीय सूत्रों के हवाले से नए सवाल उठ रहे हैं।
सूत्रों का दावा है कि पहले जिन बाहरी व्यक्तियों पर कथित रूप से मार्किंग सिस्टम चलाने के आरोप लगते थे, अब उनके स्थान पर कार्यालय के अंदर से ही पूरी प्रक्रिया संचालित होने लगी है। आरोप यह भी हैं कि एक निजी व्यक्ति आवेदकों के ड्राइविंग लाइसेंस और अन्य दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराने की प्रक्रिया में सक्रिय दिखाई देता है। इसके बाद संबंधित फाइलें अधिकारी तक पहुंचाई जाती हैं। सवाल उठता है कि किसी निजी व्यक्ति को सरकारी दस्तावेजों की प्रक्रिया में किसने व किस नियम के तहत शामिल किया है।
लोगों का यह भी कहना है कि संबंधित अधिकारी अधिकांश समय कार्यालय में उपलब्ध नहीं रहते। शिकायतकर्ताओं के अनुसार अधिकारी घर से ही अधिकांश फाइलों का निस्तारण करते हैं और कार्यालय में उनकी उपस्थिति बेहद सीमित रहती है। लोग बताते हैं की सप्ताह में केवल एक-दो दिन ही अधिकारी कार्यालय पहुंचते हैं। ऐसे में आम नागरिक, जो अपनी समस्या लेकर आरटीओ कार्यालय पहुंचते हैं, उन्हें निराश होकर लौटना पड़ता है।
चर्चा तो यह भी है कि पहले जिस कथित मार्किंग सिस्टम को लेकर सवाल उठे थे, उसके बंद होने के बाद लेन-देन की जिम्मेदारी अब अंदरूनी स्तर पर संचालित होने लगी है। अब वही लोग, जो पहले कथित तौर पर उस व्यवस्था का हिस्सा बताए जाते थे, विभाग की अंदरूनी जानकारियां सार्वजनिक कर रहे हैं। इससे पूरे मामले की निष्पक्षता और कार्यप्रणाली पर नए सवाल खड़े हो रहे हैं।
यह हस्ताक्षर कार्यालय द्वारा नियुक्त किया गया बाहरी व्यक्ति करता है, उसके बाद ही प्रक्रिया आगे बढ़ती है, हस्ताक्षर के बाद फोटो खींची जाती है व ड्राइविंग लाइसेंस बनने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है…..

लगाए जा रहे आरोपो मे यदि सच्चाई है तो परिवहन विभाग और जिला प्रशासन को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि सरकारी कार्यों में निजी व्यक्तियों की क्या भूमिका है, अधिकारी कार्यालय में नियमित रूप से उपस्थित रहते हैं या नहीं, और आम नागरिकों को पारदर्शी एवं नियमसम्मत सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। जनता का विश्वास तभी कायम रहेगा, जब व्यवस्था सवालों के जवाब तथ्यों और पारदर्शिता के साथ देगी।
AI से बनाई गईं व्यंगात्मक कार्टून फोटो।
कार्यालय के कुछ एजेंट नाम ना लिखने की शर्त पर बताते हैं कि, पहले ड्राइविंग लाइसेंस के आवेदन संबंधित ….. तिवारी जी के पास जाएंगे, उनके हस्ताक्षर होंगे, उसके बाद प्रक्रिया आगे बढ़ेगी.. हालांकि तिवारी जी आरटीओ कार्यालय के कोई कर्मचारी नहीं है बल्कि आरटीओ कार्यालय द्वारा नियुक्त किये गए प्राइवेट व्यक्ति हैं…….
Amit Mishra
Author: Amit Mishra

Group Editor, Rewanchal Roshni News Group

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