Edition

मानसून की बेरुखी का असर, बालू कारोबार और हजारों लोगों की रोजी-रोटी पर मंडराया खतरा

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

लातेहार
मानसून की दस्तक के बाद भी बरवाडीह क्षेत्र में अपेक्षित वर्षा नहीं होने का असर अब सिर्फ खेती तक सीमित नहीं रहा है। कोयल, धड़धड़ी समेत अन्य नदियों में अब तक सामान्य बाढ़ नहीं आने से बालू के प्राकृतिक पुनर्भरण की रफ्तार थम गई है। इसका असर अब बालू कारोबार पर भी साफ दिखाई देने लगा है।

कारोबारियों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में अच्छी वर्षा नहीं हुई तो अगले सीजन में बालू की उपलब्धता घट सकती है। इसका सीधा असर निर्माण कार्यों के साथ इस व्यवसाय से जुड़े हजारों लोगों की आजीविका पर पड़ेगा।

बाढ़ नहीं आई तो नहीं जमा हुआ नया बालू
स्थानीय लोगों के अनुसार इस वर्ष अब तक सामान्य से कम वर्षा हुई है। इसके कारण नदियों का जलस्तर अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच सका और बाढ़ जैसी स्थिति भी नहीं बनी। हर वर्ष बरसात के दौरान तेज बहाव के साथ पहाड़ी क्षेत्रों से नई बालू नदी तल में जमा होती है।

यही प्राकृतिक प्रक्रिया अगले सीजन के लिए बालू का प्रमुख आधार बनती है, लेकिन इस बार कम वर्षा के कारण इस प्रक्रिया पर असर पड़ा है।

कारोबार और रोजगार दोनों पर खतरे के संकेत
बालू कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि नदियों से लगातार बालू का उठाव होता रहता है। यदि बरसात के मौसम में उसका प्राकृतिक पुनर्भरण नहीं हुआ तो आने वाले समय में बालू की कमी होना तय है। इससे निर्माण कार्य प्रभावित होंगे और इस व्यवसाय से जुड़े मजदूरों, वाहन चालकों तथा छोटे कारोबारियों की आय पर भी संकट गहरा सकता है।

अब मानसून की मेहरबानी का इंतजार
कारोबारियों का कहना है कि उनकी रोजी-रोटी काफी हद तक इसी व्यवसाय पर निर्भर है।इसलिए सभी की निगाहें अब मानसून की अगली वर्षा पर टिकी हैं। उनका मानना है कि यदि आने वाले दिनों में अच्छी वर्षा हुई और नदियों में तेज बहाव आया तो प्राकृतिक रूप से नई बालू का जमाव होगा और संभावित संकट काफी हद तक टल जाएगा।

प्राकृतिक संतुलन बनाए रखना भी जरूरी
बरवाडीह के अंचलाधिकारी लवकेश सिंह ने कहा कि नदी में बालू का प्राकृतिक पुनर्भरण पूरी तरह वर्षा और जल प्रवाह पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि बालू का खनन सरकार के निर्धारित नियमों और पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप ही किया जाना चाहिए। इससे नदियों का प्राकृतिक संतुलन बना रहेगा और भविष्य के लिए बालू जैसे प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी सुनिश्चित होगा।

 

Aditya
Author: Aditya

Share करें

✓ Link copy हो गया!

Leave a Comment

और पढ़ें

error: Content is protected !!