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नैनो यूरिया से बदली किसान परशुराम राजवाड़े की खेती, उत्पादन और बचत दोनों में फायदा

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नैनो यूरिया के इस्तेमाल से किसान परशुराम राजवाड़े को खेती में मिला फायदा

नैनो यूरिया उपयोग में आसान,समय और लागत की हो रही भारी बचत

रायपुर
कृषि के क्षेत्र में नवाचार और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर जिले के किसान अब अपनी खेती को लाभ का सौदा बना रहे हैं। अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम कतकालो के  रहने वाले प्रगतिशील किसान श्री परशुराम राजवाड़े ने पारंपरिक बोरी वाले खाद की जगह नैनो यूरिया (तरल) का सफल प्रयोग कर क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए एक बेहतरीन उदाहरण पेश किया है।

पारंपरिक खाद की तुलना में नैनो यूरिया अधिक सुविधाजनक
श्री राजवाड़े ने बताया कि वे वर्ष 2024 से निरंतर नैनो यूरिया का उपयोग कर रहे हैं, जिसके परिणाम अत्यंत उत्साहजनक रहा है। उन्होंने बताया कि पहले 45 किलो की यूरिया की बोरी खरीदने पर उसकी लागत अधिक आती थी और उसे खेत तक लाने-ले जाने (परिवहन) में भारी असुविधा का सामना करना पड़ता था। अक्सर पीक सीजन में बाजार में बोरी वाले यूरिया की किल्लत हो जाती थी, जिससे खेती के कार्यों में देरी होती थी। इसके विपरीत, नैनो यूरिया की छोटी शीशी को लाना-ले जाना बेहद आसान है। यह कम लागत में मिल जाता है और बाजार में इसकी उपलब्धता भी हमेशा बनी रहती है, जिससे समय पर फसलों को पोषण मिल पाता है।

धान और सब्जियों की खेती में शानदार परिणाम
अपने अनुभवों को साझा करते हुए श्री राजवाड़े ने बताया कि उन्होंने सबसे पहले नैनो यूरिया का प्रयोग अपनी धान की फसल में किया था। वहां मिले शानदार परिणामों से उत्साहित होकर उन्होंने इसे साग-सब्जियों की खेती में भी अपना लिया। वर्तमान में वे अपनी लगभग ढाई से तीन एकड़ कृषि भूमि पर नैनो यूरिया का सफलतापूर्वक छिड़काव कर रहे हैं।

कृषकों से की अपील
किसान श्री परशुराम राजवाड़े ने बताया कि तरल नैनो यूरिया न केवल उपयोग में आसान है, बल्कि यह खेती की लागत को कम कर फसल के बेहतर उत्पादन में भी सहायक है। उन्होंने जिले के किसानों से अपील की कि वे भी उन्नत कृषि तकनीकों और नैनो उर्वरकों का अधिकाधिक उपयोग करें, ताकि खेती में लागत कम हो और मुनाफे में वृद्धि हो सके।

Aditya
Author: Aditya

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